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बड़ा सवाल तो यह है कि कितनी किस्में लैब से लैंड तक पहुँचीं? ICAR के स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की दो टूक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(ICAR) के 96वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृष‍ि मंत्री श‍िवराज स‍िंह चौहान ने किसान और कृषि विज्ञान केंद्र का संबंध अद्भुत को अद्भुत बताते हुए कहा कि जब हम किसानों को वैज्ञानि

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Pooja Rai·Correspondent·17 Jul 2024· 5 min read

बड़ा सवाल तो यह है कि कितनी किस्में लैब से लैंड तक पहुँचीं? ICAR के स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की दो टूक

बड़ा सवाल तो यह है कि कितनी किस्में लैब से लैंड तक पहुँचीं? ICAR के स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की दो टूक

नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(ICAR) के 96वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृष‍ि मंत्री श‍िवराज स‍िंह चौहान(shivraj singh chauhan)ने किसान और कृषि विज्ञान केंद्र के संबंध को अद्भुत बताते हुए कहा कि जब हम किसानों को वैज्ञानिकों से जोड़ देंगे, तो लाभ मिलेगा, उत्पादन भी बढ़ेगा और टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए हम लागत भी घटा पाएंगे।और उन्होंने कृषि के विविधीकरण को चमत्कार बताते हुए किसानों की आय बढ़ने की बात कही।

केंद्रीय कृष‍ि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को पूसा परिसर, नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR के 96वें स्थापना तथा प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में सहभागिता कर उपस्थित लोगों को संबोधित किया और शुभकामनाएं दीं।अपने भाषण में उन्होंने कहा कि ICAR ने देश को व‍िभ‍िन्न फसलों की करीब 6000 किस्में दी हैं, लेक‍िन बड़ा सवाल यह है क‍ि इनमें से कितनी किस्में लैब से लैंड तक पहुंची हैं।किसान और वैज्ञानिकों के बीच कितना जुड़ाव है, ये हमें समझना होगा। किसान और कृषि विज्ञान केंद्र का कितना संबंध है, इसका भी विश्लेषण करना होगा।

मंत्री ने बताया कि देश में 731 कृषि विज्ञान केंद्र हैं, लेक‍िन उसका उतना फायदा क‍िसानों को नहीं म‍िल पा रहा है ज‍ितना म‍िलना चाह‍िए। देश में करीब 5500 कृष‍ि वैज्ञान‍िक हैं, तो इन्हें ICAR के महान‍िदेशक जल्द से जल्द 2-2 विज्ञानिकों को हर कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में भेजकर वहां अध्ययन करवाएं क‍ि क्यों क‍िसानों और वैज्ञान‍िकों के बीच गैप है।वहां जाकर भी शोध होगा तभी हम किसानों को फायदा पहुंचा सकते हैं।ऐसा तब संभव होगा जब कृष‍ि वैज्ञान‍िक खेतों में जाकर क‍िसानों को समझाएंगे।
उन्होंने कहा क‍ि आज हम संकल्प लें कि दलहन और तिलहन में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे, इसके लिए सरकार पूरा समर्थन करेगी , इसी क्रम में दलहन के लिए समृद्वि पोर्टल बनाया गया है और सरकार किसानों को जागरूक करने के अभियान के ज़रिये पूरी कोशिश कर रही है।

वैज्ञानिकों को दिया गया 4 साल का लक्ष्य
कृषि मंत्री ने कहा क‍ि वो खुद भी एक क‍िसान हैं।और कहा कि छोटी जोत के सीमांत किसान के लिए मॉडल फॉर्म बनाने की ज़रूरत है।कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मा है और किसान उसकी रीढ़ है। क‍िसानों की सेवा करना भगवान की सेवा करना है। अगर कृषि में वैज्ञान‍िकों का योगदान बढ़े, उत्पादकता में इजाफा हो तो क‍िसानों की आय चार गुना तक बढ़ सकती है। कृषि विविधिकरण कर देंगे तो किसानों की खेती में आय बढ़ाना संभव है। आज हम इसी संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। वैज्ञानिक 4 साल के लक्ष्य को निर्धारित करें और 4 साल के बाद हम कहें कि हमने यह लक्ष्य पूरे किए हैं।

लैब टू लैंड से खेती होगी आसान
कृष‍ि मंत्री ने कहा क‍ि ICAR के सभी वैज्ञानिक साल में एक महीना खेत में जाकर किसानों को सिखाएं।सभी कृषि विश्वविद्यालय कैसे किसानों के लिए काम करें, इस पर ध्यान देना होगा।कृषि विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक और खेत एक साथ जुड़ेंगे तभी कृषि में क्रांति आएगी। और कहा कि उत्पादन बढ़ाना जरूरी है लेकिन इस पर भी ध्यान देना जरूरी है कि मानव शरीर पर उसका क्या प्रभाव होगा। प्राकृतिक खेती पर भी र‍िसर्च करना होगा।श्रीअन्न का उत्पादन कैसे बढ़े, इस पर भी प्रधानमंत्री जी ने चिंता व्यक्त की है।इसल‍िए इसका उत्पादन बढ़ाने पर भी काम करना होगा।

ये भी पढ़ें -दालों पर लाभ मार्जिन कम करें खुदरा व्‍यापारी, सरकार ने कहा- मुनाफाखोरी पर होगी सख्‍त कार्रवाई

डेयरी सेक्टर को संगठित क्षेत्र में लाने पर जोर
इस आयोजन में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मौजूद थे।उन्होंने कहा कि पशुधन और मत्स्य पालन सकल घेरलू उत्पाद में 35 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। अगर हम इस पर ध्यान नहीं देंगे तो यह नीचे गिर सकता है।मत्स्य पालन में हम दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।पशुधन और मत्स्य पालन को हम आगे बढ़ायेंगे तो बहुत लाभ होगा। पशुपालन विभाग फुट एंड माउथ ड‍िजीज (FMD) के निराकरण में लगा हुआ है।पशुधन को भी आप प्राथमिकता दें। डेयरी सेक्टर पूरी तरह से असंगठित क्षेत्र है, हम इसे कैसे संगठित क्षेत्र में लाएंगे इस पर काम करना होगा तभी हम डेयरी सेक्टर को विकसित कर सकेंगे।

विष रहित खाद और विष मुक्त भोजन हो प्राथमिकता
आयोजन में उपस्थित कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृष‍ि वैज्ञान‍िकों ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन के लिए बहुत काम किए हैं लेकिन उत्पादन के बाद अनाज के भंडारण की व्यवस्था नहीं हो पाई है। अनाज उत्पादन के भंडारण व्यवस्था पर काम करें। खेती को विष रहित खाद चाहिए और मनुष्यों को विष मुक्त भोजन मिलें, इस दिशा में वैज्ञानिकों को शोध करना चाहिए। खेती में खाद की उपयोगिता न के बराबर हो इस के लिए काम करें।

आयोजन में ICAR के महान‍िदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि ICAR ने टेक्नोलॉजी की मदद से भारत को भुखमरी से बाहर न‍िकाला है। कभी भारत दूसरे देशों से खाद्यान्न मंगा रहा था तो अब कई देशों को एक्सपोर्ट कर रहा है। वहां केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन भी मौजूद थे। यहां फसलों की 25 किस्में, पशु विज्ञान व मत्स्य विज्ञान के लिए वैक्सीन किट और साथ ही, फसलों के वेस्ट से बने विभिन्न उत्पाद भी जारी किए गये और यहाँ अच्छा काम करने वाले वैज्ञानिकों को सम्मान‍ित भी क‍िया गया।
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