News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. बजट 2026 से कृषि और किसानों के लाभ-हानि का लेखा-जोखा— प्रो. के.एन. तिवारी
एग्री बुलेटिन

बजट 2026 से कृषि और किसानों के लाभ-हानि का लेखा-जोखा— प्रो. के.एन. तिवारी

प्रो. केएन तिवारी के मुताबिक केंद्रीय बजट 2026 में कृषि के लिए आवंटन बढ़ाया गया है और सरकार ने उच्च मूल्य वाली फसलों, निर्यात, भंडारण और तकनीक पर फोकस किया है। हालांकि उर्वरक सब्सिडी बढ़ने के बावजूद य

NP

Pooja Rai·Correspondent·02 Feb 2026· 4 min read

बजट 2026 से कृषि और किसानों के लाभ-हानि का लेखा-जोखा— प्रो. के.एन. तिवारी

बजट 2026 से कृषि और किसानों के लाभ-हानि का लेखा-जोखा— प्रो. के.एन. तिवारी

प्रो. के. एन. तिवारी के मुताबिक केंद्रीय बजट 2026 में कृषि के लिए आवंटन बढ़ाया गया है और सरकार ने उच्च मूल्य वाली फसलों, निर्यात, भंडारण और तकनीक पर फोकस किया है। हालांकि उर्वरक सब्सिडी बढ़ने के बावजूद यूरिया सुधार, एमएसपी गारंटी और छोटे किसानों की बुनियादी समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनका मानना है कि बजट सतत विकास की दिशा में तो है, लेकिन संरचनात्मक सुधारों की कमी के कारण इसकी सफलता सीमित रह सकती है।

केंद्रीय बजट 2026 ने कृषि क्षेत्र में मिश्रित प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। एक ओर सरकार ने कृषि के लिए आवंटन बढ़ाया है और उच्च मूल्य वाली फसलों, निर्यात और तकनीक पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर सब्सिडी आधारित ढांचे और छोटे किसानों की बुनियादी समस्याओं को लेकर कई सवाल भी खड़े होते हैं। यह बजट पूरी तरह निराशाजनक नहीं है, लेकिन इसमें अपेक्षित सुधारों की कमी साफ नजर आती है।

यह विश्लेषण प्रो. के.एन. तिवारी का है, जो चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वे इंटरनेशनल प्लांट न्यूट्रिशन इंस्टिट्यूट (इंडिया प्रोग्राम) के पूर्व निदेशक भी रहे हैं। प्रो. तिवारी को कृषि, मृदा स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका आधारित सतत कृषि प्रणालियों में 50 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वे इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और लेखक माने जाते हैं।

कृषि बजट बढ़ा, लेकिन दिशा पर सवाल
उन्होंने कहा कि बजट 2026 में कृषि के लिए ₹1,62,671 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 7 प्रतिशत अधिक है। सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण और निर्यात-उन्मुख खेती पर है। नारियल, काजू, अखरोट और चॉकलेट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। यह रणनीति समग्र अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इससे सब्सिडी पर निर्भर छोटे किसानों की समस्याएं पूरी तरह हल होती नहीं दिखतीं।

उच्च मूल्य वाली फसलों पर फोकस
प्रो. तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में केंद्र सरकार का उच्च मूल्य वाली फसलों पर फोकस गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था के लिए मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि इसे राज्य के 2025–26 के कृषि बजट (कृषि पर ₹89,353 करोड़) के साथ सही तालमेल में लागू किया जाए।राज्य स्तर पर प्राकृतिक खेती जैसी योजनाएं और बीज पार्क किसानों के लिए सहायक होंगी, लेकिन यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी में की गई वृद्धि उर्वरकों के संतुलित उपयोग को कैसे मजबूत करेगी।

पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम करने की कोशिश
उन्होंने कहा कि फसल कटाई के बाद 15–20 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बजट में वेयरहाउस, कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में निवेश को प्राथमिकता दी गई है। इससे भंडारण क्षमता बढ़ेगी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बनेंगे और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

पशुपालन, मत्स्य पालन और तकनीक
बजट में पशुपालन के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और मत्स्य पालन के लिए 500 जलाशयों के विकास का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत विस्तार’ नाम का बहुभाषी AI टूल लाने की घोषणा की गई है, जो फसल योजना, मौसम पूर्वानुमान और कीट प्रबंधन में डेटा-आधारित सलाह देगा।

ये भी पढ़ें - Budget 2026-27: क्या Bharat-VISTAAR बनेगा किसानों के लिए गेम-चेंजर?

उर्वरक सब्सिडी बढ़ी, सुधार अधूरे
प्रो. तिवारी के मुताबिक सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को बढ़ाकर ₹1.7 लाख करोड़ कर दिया है, जिससे वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव से किसानों को अल्पकालिक राहत मिलेगी। लेकिन बजट में यूरिया को पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) में शामिल करने, कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी घटाने, और GST की इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसी पुरानी और महत्वपूर्ण मांगों पर कोई फैसला नहीं किया गया।

सरकार की मजबूरी या रणनीति?
प्रो. तिवारी के अनुसार, सरकार ने शायद वित्तीय अनुशासन और राजनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए संरचनात्मक सुधारों से दूरी बनाई। यूरिया को NBS में लाने से उसके खुदरा दाम बढ़ सकते थे, जिससे किसानों का विरोध और राजनीतिक दबाव बढ़ने की आशंका थी। इसी तरह कस्टम ड्यूटी में कटौती से राजस्व घाटा बढ़ सकता था।

मिट्टी के स्वास्थ्य पर खतरा
उन्होंने कहा कि इन सुधारों के अभाव में मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश (NPK) का असंतुलन बना रहेगा, खासकर यूरिया के अत्यधिक उपयोग के कारण। इससे लंबे समय में मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादकता दोनों प्रभावित होंगी। साथ ही उर्वरक उद्योग में निवेश और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर भी असर पड़ेगा।

छोटे किसानों की अनदेखी
प्रो. तिवारी ने कहा कि बजट में एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज संकट, मौसम जोखिम और फ्यूचर ट्रेडिंग बहाली जैसी मांगों को जगह नहीं मिली। इससे देश के लगभग 85 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों की आय अस्थिर बनी रह सकती है।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— बजट 2026 से कृषि और किसानों के लाभ-हानि का लेखा-जोखा— प्रो. के.एन. तिवारी

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
agriculture newsbudget 2026kheti kisaniNews PotliProf. KN TiwariShivraj Singh Chouhanuttar pradesh
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 Feb 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·09 Feb 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·09 Feb 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs