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पिछले दस वर्षों में कुल 2900 जलवायु-अनुकूल उच्च उपज वाली फसलें विकसित की गईं : सरकार

2014-2024 के दौरान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के देख रेख में आईसीएआर संस्थानों और राज्य/केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों (सीएयू/एसएयू) सहित राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) ने 2900 स्थान

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Pooja Rai·Correspondent·12 Mar 2025· 4 min read

पिछले दस वर्षों में कुल 2900 जलवायु-अनुकूल उच्च उपज वाली फसलें विकसित की गईं : सरकार

पिछले दस वर्षों में कुल 2900 जलवायु-अनुकूल उच्च उपज वाली फसलें विकसित की गईं : सरकार

2014-2024 के दौरान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के देख रेख में आईसीएआर संस्थानों और राज्य/केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों (सीएयू/एसएयू) सहित राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) ने 2900 स्थान विशिष्ट उन्नत फसल किस्में/संकर विकसित की हैं, जिनमें अनाज की 1380, तिलहन की 412, दलहन की 437, फाइबर फसलों की 376, चारा फसलों की 178, गन्ने की 88 और अन्य फसलों की 29 शामिल हैं।

सरकार द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि इन 2900 किस्मों में से 2661 किस्में (अनाज 1258; तिलहन 368; दलहन 410; फाइबर फसलें 358; चारा फसलें 157, गन्ना 88 और अन्य फसलें 22) एक या एक से अधिक जैविक और/या अजैविक तनावों के प्रति सहनशील हैं। बताया है कि इस अवधि के दौरान चावल (14), गेहूँ (53), मक्का (24), बाजरा (26), तिलहन (21), दालें (9) और अनाज चौलाई (5) की 152 जैव-प्रबलित किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं।

बागवानी फसलों की कुल 819 किस्में जारी
इसी तरह, बागवानी फसलों में, पिछले दस वर्षों (2014-2024) के दौरान, कुल 819 किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं, जिनमें बारहमासी मसाले (60), बीज मसाले (49), आलू और उष्णकटिबंधीय कंद फसलें (71), बागान फसलें (26), फल फसलें (123), सब्जी फसलें (429), फूल और अन्य सजावटी पौधे (53) और औषधीय और सुगंधित पौधे (8) शामिल हैं; जिनमें से 19 जैव-प्रबलित किस्में हैं।यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी है।

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विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त मांगों के अनुसार इन किस्मों के प्रजनक और गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन करने के लिए व्यवस्थित प्रयास किए गए हैं। किसानों को बीज की शीघ्र आपूर्ति के लिए रबी 2024-25 से पर्याप्त गुणवत्ता वाले प्रजनक बीज उत्पादन और खरीफ 2025 के लिए प्रसंस्करण की योजना बनाई गई है। सभी प्रजनक बीज उत्पादन/किस्म विकास केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि वे उपलब्ध प्रजनक/स्टॉक बीज को राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड (एनएससीएल), राज्य बीज निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी क्षेत्र, एफपीओ और अन्य एजेंसियों जैसे बीज उत्पादन एजेंसियों के साथ साझा करें ताकि इन किस्मों के बीज किसानों को उपलब्ध कराए जा सकें। तेजी से गुणन के लिए किसान भागीदारी बीज उत्पादन कार्यक्रम के माध्यम से किसानों के खेतों पर भी बीज उत्पादन किया जाएगा।

जागरूकता पैदा करने के लिए हर संभव प्रयास
दूरदर्शन चैनलों, ऑल इंडिया रेडियो, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से बीज उत्पादन एजेंसियों और किसानों के बीच इन किस्मों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। इन उन्नत फसल किस्मों के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन नियमित रूप से पूरे देश में आईसीएआर संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) किसानों को इन उन्नत फसल किस्मों का प्रदर्शन करते हैं। अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) और उत्तर पूर्व हिमालय (एनईएच) क्षेत्र कार्यक्रमों के तहत किसानों को इन उन्नत फसल किस्मों के बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

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खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन
भारत सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत बीज एवं रोपण सामग्री (एसएमएसपी) पर उप-मिशन के बीज ग्राम कार्यक्रम घटक को लागू कर रही है। इस योजना का उद्देश्य गांव के किसानों को जलवायु अनुकूल, जैव-सशक्त और उच्च उपज देने वाली किस्मों के बीज उपलब्ध कराना है। इस कार्यक्रम के तहत, आधार/प्रमाणित बीजों के वितरण के लिए वित्तीय सहायता अनाज में बीज लागत का 50% और तिलहन, चारा और हरी खाद फसलों में प्रति किसान एक एकड़ के लिए गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन के लिए 60% है। 2024-25 से 2030-31 के दौरान घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) हासिल करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन (एनएमईओ-ओएस) को मंजूरी दी गई है।
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