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पश्चिम बंगाल: बांकुरा में मक्खियों का आतंक, मच्छरदानी में दिन बिताने को मजबूर ग्रामीण

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के 23 से ज्यादा गांव इन दोनों अनोखे मगर जानलेवा संकट से जूझ रहे हैं। वजह से मक्खियों का आतंक। मुर्गी हैचरी की गंदगी से फैली मक्खियों ने लोगों का जीवन नर्क बना दिया है। लोग

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Jalish· Correspondent

25 जून 2025· 3 min read

Bankuradisease of monsoonhouse fly
पश्चिम बंगाल: बांकुरा में मक्खियों का आतंक, मच्छरदानी में दिन बिताने को मजबूर ग्रामीण

पश्चिम बंगाल: बांकुरा में मक्खियों का आतंक, मच्छरदानी में दिन बिताने को मजबूर ग्रामीण

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के 23 से ज्यादा गांव इन दोनों अनोखे मगर जानलेवा संकट से जूझ रहे हैं। वजह से मक्खियों का आतंक। मुर्गी हैचरी की गंदगी से फैली मक्खियों ने लोगों का जीवन नर्क बना दिया है। लोग बीमार हो रहे हैं। इलाके में डायरिया और आंत से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, खासकर बच्चों पर इसका गंभीर असर पड़ा है।

गांव के लोगों का कहना है कि, इस हालात ने जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मक्खियां खाने, पीने और जीवन की हर बुनियादी जरूरत में दिक्कत बन चुकी हैं। ग्रामीण दिन में भी मच्छरदानियों का सहारा ले रहे हैं।

बांकुड़ा-पुरुलिया नेशनल हाईवे के पास काशिबेड़ा और कल्पाथर गांवों में चार हैचरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि, ये हैचरी मक्खियों के प्रजनन की जड़ हैं।

गुस्साए लोगों ने मंगलवार को काशिबेड़ा स्थित ग्लोरियस एग्रो एग्ज़िम प्राइवेट हैचरी के सामने विरोध प्रदर्शन किया और हैचरी में काम करने वालों को अंदर नहीं जाने दिया।

“हम खाना नहीं बना पा रहे हैं, न ही खा पा रहे हैं। बच्चे बीमार हो रहे हैं। अब जीना मुश्किल हो गया है।”
गुना माल, काशिबेड़ा गांव

मंगलवार को पुलिस मौके पर पहुंची और हैचरी प्रबंधन ने लिखित में वादा किया कि, सात दिनों में कदम उठाए जाएंगे। 26 जून को जिला पुलिस कार्यालय में गांव प्रतिनिधियों और हैचरी मालिकों के साथ बैठक होगी।

स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता चपला नंदी ने न्यूज़ पोटली को दिखाया कि, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बनने वाला भोजन तक मक्खियों से ढका हुआ है। काशिबेड़ा की अंबिका मंडल ने बताया

“तीन साल का बेटा हिरण्मय डायरिया और बुखार से पीड़ित है। पूरा दिन मच्छरदानी के भीतर बैठा रहता है।”

“मक्खियों की वजह से सामाजिक संकट भी गहराया है, शादी-ब्याह रुक गए हैं। लड़कियों वाले गांव में आते हैं और मक्खियों को देख कर रिश्ता तोड़ देते हैं।" तपन ढाक, निवासी, कलपथर

हैचरी मजदूरों की परेशानी

हैचरी में काम करने वाली गुपाली मुर्मू ने कहा, “हम मक्खियों के बीच काम कर रहे हैं, लेकिन यहीं से घर चलता है। अगर हैचरी बंद हुई तो हमारी रोज़ी-रोटी खत्म हो जाएगी।”

वैज्ञानिक नजरिया

बांकुरा समिलानी कॉलेज के प्राणी विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर असीत भौमिक के अनुसार, गीली गंदगी और मुर्गियों की बीट मक्खियों के प्रजनन की सबसे अनुकूल जगह है। उनके मुताबिक हैचरियों में तापमान अपेक्षाकृत कम और नमी ज्यादा होती है, जिससे मक्खियां तेजी से फैलती हैं। उनका सुझाव है कि, गंदगी को तुरंत साफ किया जाए, मरी हुई मुर्गियों और गीली लेटर को जमीन में गाड़ा जाए और नियमित रूप से चूना और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हो।

हैचरी प्रबंधन की सफाई

हैचरी प्रबंधन का दावा है कि, वो सफाई करते हैं और कीटनाशकों का छिड़काव भी हुआ है। हालांकि गांव वालों का कहना है कि, हैचरी प्रबंधन की तरफ से कभी छिड़काव नहीं किया गया।

इसे पूरे मामले पर बांकुरा जिला परिषद की सभाधिपति अनसूया राय ने कहा कि “प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीर है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

वीडियो: मज़दूर से करोड़पति किसान बनने का सफर

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