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पपीते की पैदावार में 60% बढ़ोतरी, F1 पपीता बना एक्सपोर्ट का मानक

भारत में पपीते का उत्पादन इस साल करीब 60% बढ़ा है, जिससे निर्यात मजबूत हुआ है। बेहतर गुणवत्ता और लंबी शेल्फ लाइफ वाली F1 किस्म के कारण भारतीय पपीता कई देशों में निर्यात किया जा रहा है।

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Pooja Rai·Correspondent·19 Dec 2025· 3 min read

पपीते की पैदावार में 60% बढ़ोतरी, F1 पपीता बना एक्सपोर्ट का मानक

पपीते की पैदावार में 60% बढ़ोतरी, F1 पपीता बना एक्सपोर्ट का मानक

भारत में पपीते का उत्पादन इस साल करीब 60% बढ़ा है, जिससे निर्यात मजबूत हुआ है। बेहतर गुणवत्ता और लंबी शेल्फ लाइफ वाली F1 किस्म के कारण भारतीय पपीता कई देशों में निर्यात किया जा रहा है।

भारत में पपीते की फसल इस साल काफी बेहतर रही है, जिसका सीधा फायदा पपीता निर्यात को मिल रहा है। गुजरात की फ्रेश प्रोड्यूस निर्यातक कंपनी कृपली ट्रेडर्स के अरविंद जेठवा के अनुसार, इस बार भारत में पपीते का उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक आंका जा रहा है। पिछले वर्ष खराब मौसम के कारण पपीते की गुणवत्ता और निर्यात योग्य मात्रा दोनों प्रभावित हुई थीं।

उत्पादन बढ़ा, सप्लाई ज्यादा मजबूत
भारत में पपीता निर्यात के प्रमुख क्षेत्र महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश हैं। इन तीनों राज्यों से इस बार बेहतर और लगातार सप्लाई मिल रही है, जिससे निर्यातकों को भरोसेमंद पाइपलाइन मिली है।निर्यात बाजार में आमतौर पर 3 से 6 इंच लंबाई और 1 से 1.5 किलो वजन वाले बड़े पपीते पसंद किए जाते हैं। खरीदार चीनी की मात्रा (ब्रिक्स) से ज्यादा फल की मजबूती, आकार और स्वाद पर ध्यान देते हैं।

F1 पपीता बना निर्यात का मानक
अरविंद जेठवा बताते हैं कि अब F1 किस्म का पपीता भारत में निर्यात के लिए मानक बन चुका है। यह किस्म स्वाद में अच्छी होती है, लंबे समय तक खराब नहीं होती और कई तरह से इस्तेमाल की जा सकती है।इसे ताजा फल के रूप में भी भेजा जाता है और मिठाई व अन्य प्रोसेस्ड उत्पादों में भी इसका उपयोग होता है। इसी वजह से इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

इस साल गुणवत्ता बेहतर
उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में काफी पपीता निर्यात के लायक नहीं था, लेकिन इस साल स्थिति बेहतर है। फल मजबूत हैं, स्वाद अच्छा है और बड़े आकार के पपीते ज्यादा मिल रहे हैं।कोल्ड चेन और सावधानी से हैंडलिंग करने पर भारतीय पपीते कटाई के बाद करीब 30 दिन तक सुरक्षित रह सकते हैं। इसी वजह से अब कनाडा जैसे दूर के देशों में भी समुद्री रास्ते से पपीता भेजा जा रहा है।

ये भी पढ़ें - FAIFA का श्वेत पत्र: पर्माकल्चर आधारित खेती और निवेश योजना की बात

कीमत और सप्लाई का समय
गुजरात में इस समय किसानों को पपीते का भाव करीब 0.2 डॉलर प्रति किलो मिल रहा है। वहीं महाराष्ट्र में लागत और लंबी दूरी के कारण कीमत थोड़ी ज्यादा है।उन्होंने बताया कि राज्यवार सप्लाई का समय अलग-अलग है, जैसे महाराष्ट्र से निर्यात नवंबर के अंत से जनवरी तक। इसके बाद करीब एक महीने उत्तर प्रदेश से सप्लाई और फिर गुजरात की मुख्य सप्लाई साल के दूसरे महीने से शुरू होकर आगे तक चलती है।

किन देशों में जा रहा भारतीय पपीता
कृपली ट्रेडर्स फिलहाल भारतीय पपीता दुबई, कनाडा, मालदीव, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों में भेज रही है। लागत कम रखने के लिए ज्यादातर निर्यात रेफ्रिजरेटेड समुद्री जहाजों से किया जाता है।
कंपनी भविष्य में यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में भी विस्तार की योजना बना रही है, जहां भारतीय पपीते का उपयोग प्रोसेसिंग में किया जाता है।अरविंद जेठवा के अनुसार, जैसे-जैसे उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार संपर्क बेहतर होंगे, भारतीय पपीता निर्यात में आगे और तेजी आने की पूरी संभावना है।

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