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पंजाब का रणसिंह कलां गांव बना पराली रहित खेती का मॉडल

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के मोगा जिले के रणसिंह कलां गांव का दौरा किया और किसानों को छह साल से पराली न जलाने और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि यह मॉ

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Pooja Rai·Correspondent·28 Nov 2025· 3 min read

पंजाब का रणसिंह कलां गांव बना पराली रहित खेती का मॉडल

पंजाब का रणसिंह कलां गांव बना पराली रहित खेती का मॉडल

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के मोगा जिले के रणसिंह कलां गांव का दौरा किया और किसानों को छह साल से पराली न जलाने और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि यह मॉडल पूरे देश में लागू किया जाएगा। गांव के किसान डायरेक्ट सीडिंग, हैप्पी सीडर और अवशेष प्रबंधन जैसी तकनीकों से बिना आग लगाए खेत तैयार कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ी है और पानी व खाद की बचत हो रही है।

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के मोगा जिले के रणसिंह कलां गांव का दौरा किया और किसानों से खेतों में बातचीत की। उन्होंने गांव की पंचायत और किसानों को लगातार छह साल से पराली न जलाने और वैज्ञानिक तरीकों से फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने के लिए बधाई दी। चौहान ने कहा कि यह मॉडल आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है, खासकर उस समय जब दिल्ली और उत्तर भारत पराली से होने वाले प्रदूषण का सामना कर रहे हैं।

डायरेक्ट सीडिंग करते हैं किसान
मंत्री ने बताया कि रणसिंह कलां गांव के किसान डायरेक्ट सीडिंग, हैप्पी सीडर और अवशेषों को खेत में मिलाने जैसे आधुनिक तरीके अपनाकर बिना आग लगाए खेत तैयार कर रहे हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई है, कार्बन स्तर बढ़ा है और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हुई है। उन्होंने खेत निरीक्षण के दौरान किसानों के साथ गेहूं की सीधी बुवाई देखी और बताया कि इस पद्धति में शुरुआती एक महीने तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी और डीजल दोनों की बचत होती है।

ये भी पढ़ें - 2047 की तैयारी, खेती में ग्रीन फ्यूल और आधुनिक मशीनरी पर सरकार का जोर

तिलहन फसलें बढ़ाने की अपील
चौहान ने किसानों से तिलहन फसलें बढ़ाने की अपील की और कहा कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश खाद्य तेलों के आयात से आत्मनिर्भर बनेगा। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि तुअर, उड़द, मसूर और चना जैसी दलहन फसलों की पूरी खरीद एमएसपी पर की जाएगी, जिसके लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

गांव की पंचायत की सराहना की
उन्होंने गांव की पंचायत की सराहना करते हुए कहा कि इस गांव ने पराली प्रबंधन, नशामुक्ति, फसल विविधिकरण और सामुदायिक निर्णयों में नया मानक स्थापित किया है। अंत में उन्होंने कहा कि असली विकास तब होगा जब नीतियाँ खेतों और किसानों के अनुभवों के आधार पर बनाई जाएँगी, और सरकार खेती को लाभकारी और गांवों को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

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