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नवंबर–दिसंबर में यूरिया-DAP की बढ़ती मांग, सरकार के सामने आपूर्ति की चुनौती

इस बार नवंबर–दिसंबर में यूरिया और डीएपी की मांग बहुत बढ़ गई है, क्योंकि रबी फसलों का रकबा 27% बढ़ा है। शुरुआती नवंबर में इन खादों की बिक्री पिछले साल से दोगुनी रही। यूरिया का स्टॉक पिछले साल की तुलना

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Pooja Rai·Correspondent·15 Nov 2025· 3 min read

नवंबर–दिसंबर में यूरिया-DAP की बढ़ती मांग, सरकार के सामने आपूर्ति की चुनौती

नवंबर–दिसंबर में यूरिया-DAP की बढ़ती मांग, सरकार के सामने आपूर्ति की चुनौती

इस बार नवंबर–दिसंबर में यूरिया और डीएपी की मांग बहुत बढ़ गई है, क्योंकि रबी फसलों का रकबा 27% बढ़ा है। शुरुआती नवंबर में इन खादों की बिक्री पिछले साल से दोगुनी रही। यूरिया का स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम है, इसलिए इसकी उपलब्धता चुनौती बन सकती है। मंत्रालयों के बीच तालमेल की कमी से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। सरकार ने कमी रोकने के लिए अप्रैल से अब तक 3.17 लाख छापे डालकर जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई की है और कह रही है कि किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

देश में इस बार रबी सीजन की शुरुआत में ही यूरिया और डीएपी की बिक्री तेजी से बढ़ गई है। नवंबर के पहले हफ्ते में इन दोनों उर्वरकों की बिक्री पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा रही है। आमतौर पर नवंबर–दिसंबर का समय रबी की बुवाई का पीक सीजन होता है और कुल बिक्री का लगभग आधा हिस्सा इसी दो महीने में होता है। ऐसे में अचानक बढ़ी हुई मांग सरकार के लिए चुनौती बन सकती है।

नवंबर महीने में यूरिया की कुल मांग 43.54 लाख टन
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक 1 नवंबर को देश में उर्वरकों का जो स्टॉक था, उसमें डीएपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स खाद पहले से बेहतर मात्रा में उपलब्ध थे, लेकिन यूरिया का स्टॉक पिछले साल से कम रहा। नवंबर महीने में यूरिया की कुल मांग 43.54 लाख टन और डीएपी की 17.19 लाख टन मानी गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यूरिया को छोड़कर बाकी खादों का स्टॉक नवंबर की जरूरतें पूरी कर सकता है, वहीं नई सप्लाई व आयात से उपलब्धता और बढ़ेगी।

बढ़ सकती है मांग
हालांकि कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खरीफ सीजन की तरह इस बार भी मंत्रालयों के बीच तालमेल की कमी से आपूर्ति में दिक्कतें आ सकती हैं। पिछले साल धान और मक्का का रकबा बढ़ने से यूरिया की मांग अचानक बढ़ी थी, जिस वजह से कई जगह किसानों ने कमी की शिकायत की थी। इस बार गेहूं को अच्छे दाम मिलने के कारण इसका रकबा बढ़ने की संभावना है, इसलिए उर्वरक मांग का आकलन पहले से तय होना जरूरी है।

ये भी पढ़ें - DBW 303 (करण वैष्णवी): शुरुआती बुवाई के लिए ज्यादा पैदावार देने वाली गेहूं की किस्म

रबी फसलों का कुल रकबा 27% बढ़ा
नवंबर 1–7 के बीच ही यूरिया की 6.18 लाख टन और डीएपी की 3.49 लाख टन बिक्री दर्ज हुई, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है। रबी फसलों का कुल रकबा भी 27% बढ़कर 130 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जिसमें गेहूं का रकबा 10 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 22.7 लाख हेक्टेयर हो गया है। बढ़ते रकबे के कारण उर्वरकों की मांग भी स्वाभाविक रूप से बढ़ रही है।

अप्रैल से अब तक 3.17 लाख छापे
पिछले रबी सीजन में भी बुवाई के समय कई जगह उर्वरकों की कमी देखने को मिली थी। इसी को ध्यान में रखते हुए खाद मंत्रालय और कृषि मंत्रालय ने इस साल बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। अप्रैल से अब तक 3.17 लाख छापे और निरीक्षण किए गए हैं ताकि कालाबाजारी, जमाखोरी और गलत बिक्री पर रोक लगाई जा सके। सरकार का कहना है कि इस बार भी किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

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