News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. धान के खेतों में इस तरीके से बढ़ाई जा सकती है नाइट्रोजन की मात्रा, जानिए पूसा के वैज्ञानिकों ने और फसलों के बारे में क्या कहा?
एग्री बुलेटिन

धान के खेतों में इस तरीके से बढ़ाई जा सकती है नाइट्रोजन की मात्रा, जानिए पूसा के वैज्ञानिकों ने और फसलों के बारे में क्या कहा?

पूसा संस्थान, नई दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ की सभी फसलों की देख भाल को लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान के उन खेतों में नील हरित शैवाल के उपयोग की सल

NP

Pooja Rai·Correspondent·12 Jul 2025· 4 min read

धान के खेतों में इस तरीके से बढ़ाई जा सकती है नाइट्रोजन की मात्रा, जानिए पूसा के वैज्ञानिकों ने और फसलों के बारे में क्या कहा?

धान के खेतों में इस तरीके से बढ़ाई जा सकती है नाइट्रोजन की मात्रा, जानिए पूसा के वैज्ञानिकों ने और फसलों के बारे में क्या कहा?

पूसा संस्थान, नई दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ की सभी फसलों की देख भाल को लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान के उन खेतों में नील हरित शैवाल के उपयोग की सलाह दी है, जहां पानी भरा रहता है। इससे नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन किसानों की धान की नर्सरी 20-25 दिन की हो गई है, वे तैयार किए गए खेतों में धान की रोपाई शुरू कर दें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें। उर्वरकों में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हैक्टेयर की दर से डाले। किसान इस बात का ध्यान दें कि अगर धान की पौधशाला मे पौधों का रंग पीला पड़ रहा है तो इसमें आयरन की कमी हो सकती है। पौधों की ऊपरी पत्तियां पीली और नीचे की पत्तियां हरी हों तो यह आयरन की कमी को दर्शाता है। इसके लिए, 0.5% फेरस सल्फेट और 0.25% चूने के घोल का छिड़काव करें।

मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए ये करें
किसान नील हरित शैवाल एक पैकेट प्रति एकड़ का प्रयोग धान के उन खेतों में करें, जहां पानी भरा रहता है, ताकि मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाई जा सके। धान की खेती में नील हरित शैवाल का उपयोग अत्यंत लाभकारी है। यह जैविक उर्वरक खेतों में पानी की उपस्थिति में विकसित होता है और मिट्टी में नाइट्रोजन की आपूर्ति करता है, जिससे फसल की उपज बढ़ती है। साथ ही, धान के खेतों की मेड़ को मजबूत बनाएं, जिससे बरसात का ज्यादा से ज्यादा पानी खेतों में संचित हो सके।

ऐसे तैयार करें मिर्च, बैंगन व फूलगोभी की नर्सरी
लोबिया की बुवाई का यह उपयुक्त समय है। मिर्च, बैंगन व फूलगोभी (सितम्बर में तैयार होने वाली किस्में) की पौधशाला बनाने के लिए भी यह सही समय है। किसान भाई पौधशाला में कीट अवरोधी नायलॉन की जाली का प्रयोग करें, ताकि रोग फैलाने वाले कीटों से फसल को बचा सकें। पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए छायादार नेट से 6.5 फीट की ऊंचाई पर ढक सकते हैं। बीजों को केप्टान (2.0 ग्राम/कि.ग्रा. बीज) के उपचार के बाद पौधशाला में बुवाई करें। जल निकासी का उचित प्रबंधन रखें। जिन किसानों की मिर्च, बैंगन व फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को ध्यान में रखते हुए रोपाई की तैयारी करें।मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव साफ मौसम में करें। कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें। लौकी की उन्नत किस्में- पूसा नवीन, पूसा समृद्धि, करेला की पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी, सीताफल की पूसा विश्वास, पूसा विकास, तुरई की पूसा चिकनी धारीदार, तुरई की पूसा नसदार तथा खीरा की पूसा उदय, पूसा बरखा आदि किस्मों की बुवाई करें।

ये भी पढ़ें - 2025-26 में 52 लाख टन चावल से बनेगा एथेनॉल, OMSS के तहत गेहूं और चावल की बिक्री को लेकर नई पॉलिसी

मक्के की इन किस्मों की बुवाई करें
इस मौसम में किसान मक्का फसल की बुवाई करें। संकर किस्में ए.एच-421 व ए.एच-58 तथा उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4 बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। बीज की मात्रा 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम/हेक्टेयर 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसके अलावा यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उपयुक्त है। किसान पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें। बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हेक्टेयर रखें।

फलों के नए बाग लगाने की तैयारी
इस मौसम में फलों के नए बाग लगाने वाले तैयार गड्ढों में पौधे किसी प्रमाणित स्रोत से खरीदकर रोपाई करें। देसी खाद (सड़ी-गली गोबर की खाद, कम्पोस्ट) का अधिकाधिक प्रयोग करें, ताकि भूमि की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ सके। मिट्टी की जांच के उपरांत उवर्रकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करें। खासतौर पर पोटाश की मात्रा बढ़ाएं, ताकि पानी की कमी के दौरान फसल की सूखे से लड़ने की क्षमता बढ़ सके। वर्षा आधारित एवं बारानी क्षेत्रों में भूमि मे नमी संचयन के लिए पलवार (मलचिंग) का प्रयोग करना लाभदायक होगा।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— धान के खेतों में इस तरीके से बढ़ाई जा सकती है नाइट्रोजन की मात्रा, जानिए पूसा के वैज्ञानिकों ने और फसलों के बारे में क्या कहा?

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
agriculture newskheti kisaniNews Potlipaddy farmingpusa advisioryखेती किसानी
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 Feb 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·09 Feb 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·09 Feb 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs