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दुनिया की पहली दो Genome-edited चावल की किस्मों के बारे में जानिए

दुनिया की पहली दो जीनोम-संपादित चावल की किस्में - DRR धान 100 (कमला) और पूसा चावल DST1 हैं।

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Pooja Rai·Correspondent·09 Jul 2025· 2 min read

दुनिया की पहली दो Genome-edited चावल की किस्मों के बारे में जानिए

दुनिया की पहली दो Genome-edited चावल की किस्मों के बारे में जानिए

दुनिया की पहली दो जीनोम-संपादित चावल की किस्में - DRR धान 100 (कमला) और पूसा चावल DST1 हैं।

ये दोनों जीएम धान की किस्मों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने विकसित किया है। इन दोनों किस्मों के विकास की औपचारिक घोषणा 4 मई 2025 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी।

DRR धान 100 कमला
धान की इस नई किस्म को आईसीएआर-आईआईआरआर, हैदराबाद ने धान की सांबा महसूरी किस्म की मदद से विकसित है।
यह किस्‍म अपनी मूल धान किस्‍म से 20 दिन पहले यानी 130 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जल्‍दी पकने के कारण इसमें पानी की काफी बचत होती है।
साथ ही यह धान की सांबा और महसूरी किस्‍म के मुकाबले 19 प्रतिशत ज्‍यादा पैदावार देने में सक्षम है, जिनकी पैदावार 5.4 टन प्रति हेक्‍टेयर है।
अनुकूल परिस्थि‍तियों में यह किस्‍म 9 टन प्रति हेक्‍टेयर पैदावार देने में सक्षम है।

ये भी पढ़ें - बंपर फसल से गांवों के लोगों की आमदनी बढ़ी, भविष्य में और सुधार की उम्मीद: रिपोर्ट

पूसा चावल DST1
इस किस्म को CRISPR-Cas9 नामक उन्नत जीन एडिटिंग तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। यह आधुनिक विज्ञान के सबसे उन्नत उपकरणों में से एक है और इसका उपयोग किसी भी विदेशी जीन को शामिल किए बिना पौधे के प्राकृतिक गुणों को सटीक रूप से बढ़ाने के लिए किया गया है।
यह किस्म सूखे और नमक के प्रति सहनशील है।
इसे सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है क्योंकि इसकी पत्तियों पर कम छिद्र (रंध्र) होते हैं, जो इसे नम बनाए रखते हैं। इस आसान लेकिन प्रभावी विशेषता का मतलब है कि सूखे के समय में भी, पौधा आसानी से नहीं सूखता।
लवणीय मिट्टी में , जहाँ अन्य धान की प्रजातियाँ विफल हो जाती हैं या खराब उपज देती हैं, पूसा चावल DST1 अभी भी अच्छा प्रदर्शन करता है।

क्या है Genome-editing?
जीनोम संपादन, जिसे जीन संपादन भी कहा जाता है, एक ऐसी तकनीक है जो वैज्ञानिकों को किसी जीव के डीएनए में सटीक परिवर्तन करने की अनुमति देती है। कृषि में, इसका उपयोग खाद्य फसलों को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है, जैसे कि उन्हें रोग प्रतिरोधी बनाना, सूखा सहनशील बनाना, या पोषक तत्वों से भरपूर बनाना। जीनोम संपादन कृषि में एक महत्वपूर्ण उपकरण है, और इसका उपयोग भविष्य में खाद्य उत्पादन को बेहतर बनाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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