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तेलंगाना की तरह पंजाब के क‍िसानों की भी कर्ज माफी की मांग, इस पर व‍िपक्ष ने क्‍या कहा?

कुछ द‍िनों पहले ही तेलंगाना (Telangana) सरकार ने किसानों के 2 लाख रुपए तक के फसल कर्ज को माफ (farm loan waiver) करने का फैसला ल‍िया। इस फैसले के बाद अब पंजाब (Punjab) के किसानों केंद्र सरकार से कृषि ऋ

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Indal· Correspondent

25 जून 2024· 3 min read

agriculture indialoan waive offNews Potli
तेलंगाना की तरह पंजाब के क‍िसानों की भी कर्ज माफी की मांग, इस पर व‍िपक्ष ने क्‍या कहा?

तेलंगाना की तरह पंजाब के क‍िसानों की भी कर्ज माफी की मांग, इस पर व‍िपक्ष ने क्‍या कहा?

कुछ द‍िनों पहले ही तेलंगाना (Telangana) सरकार ने किसानों के 2 लाख रुपए तक के फसल कर्ज को माफ (farm loan waiver) करने का फैसला ल‍िया। इस फैसले के बाद अब पंजाब (Punjab) के किसानों केंद्र सरकार से कृषि ऋण माफ करने की मांग कर रहे हैं। तेलंगाना सरकार ने कहा है कि इस योजना से करीब 40 लाख किसानों को लाभ मिलेगा।

तेलंगाना सरकार के कृषि ऋण माफ किए जाने के बाद पंजाब के किसानों ने भी इसी तरह की मांग की है। किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने मांग की है कि हम तेलंगाना सरकार कर तरह कर्ज माफी की उम्‍मीद कर रहे हैं। इसके ल‍िए पंजाब और केंद्र सरकार को सोचना चाह‍िए। उन्‍होंने यह भी कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 2018 में ऋण माफी की घोषणा की थी। लेकिन केवल 5.63 लाख किसानों को 4,610 करोड़ रुपए की ऋण माफी मिल सकी थी।

यह भी पढ़ें- Wheat Stock Limit: बढ़ती कीमत और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई, कहा- देश के पास पर्याप्‍त गेहूं

पंधेर आगे कहते हैं कि हम केंद्र सरकार से माफ़ी की घोषणा करने का आग्रह करते हैं क्योंकि पीएम किसान के तहत 6,000 रुपये प्रति वर्ष का नकद लाभ अत्यधिक ऋणग्रस्त पंजाब के किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए अपर्याप्त है।

विपक्ष ने किया समर्थन किया

कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले इंडिया ने बार-बार कृषि ऋण माफी का समर्थन किया है। "जैसे ही इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी, हम पंजाब और पूरे भारत के किसानों के ऋण माफ़ कर देंगे। हम सिर्फ एक बार किसानों के ऋण माफ नहीं करेंगे, बल्कि इसके लिए एक आयोग का गठन करेंगे और इसे किसान कर्ज माफी आयोग कहेंगे। जितनी बार किसानों को माफी की जरूरत होगी, आयोग सरकार को इसके बारे में बताएगा। दो बार, तीन बार, हम जितनी बार किसानों की जरूरत होगी उतनी बार कृषि ऋण माफ करेंगे," राहुल गांधी ने मई में चुनावों से पहले कहा था। महालक्ष्मी योजना के अलावा कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र में किसानों के लिए ऋण माफी का वादा प्रमुखता से शामिल था, जिसमें गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं को 1 लाख रुपए देने का वादा किया गया था।

भारत में कृषि ऋण माफी का इतिहास

भारत में पहली कृषि ऋण माफी 1990 में कृषि और ग्रामीण ऋण राहत (ARDR) कार्यक्रम के तहत शुरू की गई थी, जिसमें किसानों को 10,000 रुपए तक के ऋण पर राहत दी गई थी और लगभग 7,800 करोड़ रुपए वितरित किए गए थे। अखिल भारतीय स्तर पर सबसे स्पष्ट ऋण माफी योजना की घोषणा तत्कालीन डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने 2009 के आम चुनावों से पहले 2008 में 'कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना' के रूप में की थी, जब 71,000 करोड़ रुपए की छूट की घोषणा की गई थी।

दृष्टि आईएएस कोचिंग के एक लेख के अनुसार 2023 में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा एक अध्ययन किया गया था, जिसमें सूचीबद्ध किया गया था कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्य सरकारों ने 2014 से मार्च 2022 तक आठ वर्षों में 2.52 लाख करोड़ रुपए की ऋण माफी की घोषणा की। इन छूटों में 368 लाख किसान लाभान्वित हुए। लेकिन राज्यों के अनुसार वितरण अलग-अलग था। सीएम रेवंत रेड्डी ने किसानों के लिए 2 लाख रुपए तक के फसल ऋण की माफी की घोषणा की, जिसकी लागत 31,000 करोड़ रुपए है। रायथु भरोसा योजना पर एक कैबिनेट उप-समिति 15 जुलाई तक पात्रता मानदंडों पर रिपोर्ट देगी।

बड़े काम का है यह वीड‍ियो

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