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गेहूं निर्यात पर सरकार सख्त, नई फसल आने तक नहीं होगा फैसला

खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि गेहूं और उससे बने उत्पादों का निर्यात नई फसल आने तक नहीं होगा और प्राथमिकता देश की खाद्य सुरक्षा है। वहीं, रोलर फ्लोर मिलर्स ने आटा, मैदा और सूजी के चरणबद्ध निर्या

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Pooja Rai· Correspondent

25 सितंबर 2025· 3 min read

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गेहूं निर्यात पर सरकार सख्त, नई फसल आने तक नहीं होगा फैसला

गेहूं निर्यात पर सरकार सख्त, नई फसल आने तक नहीं होगा फैसला

खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि गेहूं और उससे बने उत्पादों का निर्यात नई फसल आने तक नहीं होगा और प्राथमिकता देश की खाद्य सुरक्षा है। वहीं, रोलर फ्लोर मिलर्स ने आटा, मैदा और सूजी के चरणबद्ध निर्यात की मांग की, साथ ही PDS के लिए पर्याप्त भंडारण और जीएसटी में राहत की अपील की। सरकार ने 2022 में निर्यात पर रोक लगाई थी, जबकि 2024-25 में रिकॉर्ड 1175 लाख टन उत्पादन का अनुमान है।

भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल गेहूं या गेहूं से बने उत्पादों का निर्यात नहीं होगा। खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि निर्यात को लेकर कोई भी निर्णय नई फसल के आने के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने उद्योग से अपील की कि मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए गेहूं की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए।

गेहूं निर्यात बहाल हो
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलंगिया ने कहा कि अब समय आ गया है कि आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों के निर्यात की इजाजत दी जाए। उनका सुझाव है कि शुरुआत में कम से कम 10 लाख टन निर्यात की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारतीय गेहूं वैश्विक बाजार से 80–90 डॉलर प्रति टन सस्ता है, जिसका लाभ उठाया जा सकता है।

प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा
प्रह्लाद जोशी ने साफ किया कि निर्यात पर अंतिम फैसला कई मंत्रालयों के विचार के बाद ही होगा और 2026 अप्रैल में आने वाली फसल को ध्यान में रखकर ही नीति बनेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता देश की खाद्य सुरक्षा है, इसलिए किसी निश्चित गारंटी की उम्मीद न रखें।

ये भी पढ़ें - गैर-बासमती चावल निर्यात के लिए APEDA में कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

2022 से निर्यात पर रोक
आपको बता दने कि भारत ने 2022 में उत्पादन में गिरावट, सरकारी खरीद घटने और महंगाई बढ़ने के कारण गेहूं व उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हालांकि, कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि 2024–25 में रिकॉर्ड 1175 लाख टन गेहूं का उत्पादन होगा।

फेडरेशन की अन्य मांगें
भंडारण और स्थिरता: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए कम से कम एक साल यानी 180 लाख टन का भंडार होना चाहिए।
जीएसटी राहत: पैक आटा, मैदा और सूजी पर 5% जीएसटी हटाने तथा मिलिंग मशीनरी व गेहूं भंडारण साइलो पर दर 18% से घटाकर 5% करने की मांग।
अध्ययन की ज़रूरत: DDGS (ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स) के मवेशियों और दूध की गुणवत्ता पर असर का अध्ययन कराया जाए।

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