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खरगोश पालन - कम लागत में ज्यादा मुनाफ़ा देने वाला बिजनेस

लखनऊ (उत्तर प्रदेश), "खरगोश की भारत में इतनी डिमांड है कि अगले 20-25 वर्षों तक पूरी होना मुश्किल है। अगर इसमें फायदे की बात की जाए तो 10 यूनिट (100 खरगोश) से महीने में आसानी से 80 हजार से 1 लाख तक की

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Thamir· Correspondent

4 दिसंबर 2024· 4 min read

खरगोश पालन - कम लागत में ज्यादा मुनाफ़ा देने वाला बिजनेस

खरगोश पालन - कम लागत में ज्यादा मुनाफ़ा देने वाला बिजनेस

लखनऊ (उत्तर प्रदेश), "खरगोश की भारत में इतनी डिमांड है कि अगले 20-25 वर्षों तक पूरी होना मुश्किल है। अगर इसमें फायदे की बात की जाए तो 10 यूनिट (100 खरगोश) से महीने में आसानी से 80 हजार से 1 लाख तक की बचत की जा सकती है, जबकि शुरुआती लागत 5 लाख होती है।" सफेद रंग के एक बड़े खरगोश को दिखाते हुए किसान रैबिट फार्म के मालिक ए.के. सिंह कहते हैं।

खरगोश पालन को लेकर बात करते हुए ए.के. सिंह न्यूज पोटली को बताते हैं, "खरगोश पालना बेहद आसान है, इसमें पोल्ट्री या बकरी फार्म की तरह न तो ज्यादा जगह चाहिए और न ही ये बदबू करता है। यह ऐसा काम है, जिसे आप शहर के किसी छोटे से कोने में कर सकते हैं।"

दुनिया के कई देशों में खरगोश पालन एक व्यवसाय है। खरगोश का मुख्य उपयोग फार्मा इंडस्ट्री, रिसर्च इंस्टीट्यूट और मीट के लिए होता है। हर पांचवें साल जारी होने वाली पशुपालन मंत्रालय की पशुगणना के 2012 के रिपोर्ट के मुताबिक 2012 तक भारत में खरगोश की आबादी 591.6 हज़ार थी। रिसर्च गेट द्वारा 2022 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2012 में कुल 345,408 खरगोश थे। राज्यों के हिसाब से देखें तो केरल में 2,30,550, तमिलनाडु में 52,915, आंध्र प्रदेश में 36,792, कर्नाटक में 23,558, और पुडुचेरी में 1,593 खरगोश थे।

अगर खरगोश के मीट की बात करें तो कम्पटीशन फूड बिजनेस में 2021 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा मीट का उत्पादन एशिया, यूरोप, यूरोपीय यूनियन, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका में होता है। वहीं ICAR रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर गोवा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत प्रतिवर्ष 2.50 लाख टन खरगोश के मांस का उत्पादन करता है। भारत और अमेरिका खरगोश के मांस के सबसे बड़े आयातक हैं।

किसान रैबिट फार्म

किसान रैबिट फार्म किसानों को खरगोश पालन शुरू करने के लिए प्रशिक्षण और खरगोश उपलब्ध करवाने वाली निजी फर्म है। मूलरूप से हरियाणा के रहने वाले ए.के. सिंह से न्यूज पोटली टीम की मुलाकात लखनऊ के नरेंद्र नगर गांव में हुई, जहां एक पुराने मुर्गी फार्म में खरगोश पालन यूनिट चल रही है। ए.के. सिंह के मुताबिक, वह पिछले 14 वर्षों से खरगोश पालन क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उनके खरगोश रिसर्च के लिए सिर्फ मेडिकल फील्ड में सप्लाई होते हैं।
खरगोश पालन के 1 यूनिट में 7-8 मादा और 1 नर खरगोश होता है, जिसमें लगभग 50 हजार का खर्च आता है। अगर 10 यूनिट ली जाएं तो लगभग 5 लाख तक का खर्च आएगा। किसान रैबिट फार्म ही किसानों से खरगोश भी खरीदता है। इस फॉर्म से 6 हजार से अधिक किसान जुड़े हुए हैं।

ये भी पढ़ें : पपीता और हरी मिर्च की खेती से सालाना 80-90 लाख रुपए कमा रहा महाराष्ट्र का ये किसान

खरगोश पालन व्यवसाय की इकनॉमिक्स

14 साल से खरगोश पालन कर रहे ए.के. सिंह बताते हैं, “10 यूनिट खरगोश पालन करने के लिए शुरुआती खर्च लगभग 5 लाख का आता है। इसके लिए 1500 से 2000 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है। यह जगह पूरी तरह से वेंटिलेटेड होनी चाहिए।”

वो आगे बताते हैं, “एक मादा खरगोश लगभग 5 से 12 तक बच्चे देती है। ये बच्चे एक महीने में बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं। अगर फार्म के संचालन खर्चों को छोड़ दिया जाए, तो प्रति महीने 80 से 90 हजार रुपए की कमाई होती है, यानी साल में लगभग 8 से 9 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है। इसकी खाद गोबर के खाद से भी अच्छी होती है।” खरगोश पालन करने के लिए तापमान 10 से 35 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।

खरगोश के मांस का उपयोग खाने में होता है, जबकि इसके मुलायम चमड़े से पर्स, टोपी और जैकेट बनाई जाती हैं। इसके अलावा रिसर्च और दवाइयों के निर्माण में भी खरगोश का उपयोग किया जाता है।

खरगोश पालन के लिए प्रमुख नस्लें

न्यूजीलैंड व्हाइटसोवियत चिंचिला,ब्लैक ब्राउन, ग्रे जाइंट, हिमालयन, फ्रेंच अंगोरा, रेक्स, ब्रिटिश अंगोरा, कैलिफ़ोर्नियन व्हाइट, फ्लेमिश जाइंट

खरगोश का आहार

खरगोश को हरी घास या पत्तेदार सब्जियां खिलानी चाहिए। इसके साथ ही मूंगफली और चने के भूसे का आहार देना चाहिए। और खरगोश के पीने के लिए हमेशा साफ पानी उपलब्ध होना चाहिए।

खरगोश पालन के लिए सरकार से सहायता

केंद्र सरकार IDSSR योजना के तहत NABARD खरगोश पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण और सब्सिडी देती है। इस योजना के तहत सरकार 2 लाख 25 हजार रुपए की धनराशि के साथ 10 मादा और 2 नर खरगोश भी उपलब्ध कराती है। इस लोन की भुगतान अवधि 9 साल होती है। साथ ही 9 सालों के अंदर भुगतान नहीं करने वाले किसानों या पशुपालकों को 2 वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जाता है। ऋण के लिए आवेदन करने के लिए आप अपने नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी या किसी भी सरकारी बैंक से इस योजना के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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