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केले की फसल में Crop Cover क्यों जरूरी?

केला एक ऐसा फल है जो पूरे साल उपलब्ध रहता है। केला अपने अच्छे स्वाद और ज़्यादा महंगा न होने की वजह से सभी को पसंद होता है। हमारे यहाँ तो केले के पौध की पूजा की जाती है शायद यही कारण है कि आपको केले की

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Pooja Rai·Correspondent·02 Apr 2025· 3 min read

केले की फसल में Crop Cover क्यों जरूरी?

केले की फसल में Crop Cover क्यों जरूरी?

केला एक ऐसा फल है जो पूरे साल उपलब्ध रहता है। केले को अपने अच्छे स्वाद और ज़्यादा महंगा न होने की वजह से सभी पसंद भी करते हैं। हमारे यहाँ तो केले के पौध की पूजा की जाती है शायद यही कारण है कि आपको केले की फसल लगभग हर राज्य में देखने को मिल जाएगी लेकिन ज़्यादा उत्पादन की बात करें तो कुछ ही प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। केले की खेती में किसान अगर कुछ बातों का ध्यान रखें तो अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। जिनमें पौध की क्वालिटी, खेत की तैयारी और पौधों की देख भाल शामिल है।

केले का पौधा बहुत नाजुक होता है। ऐसे में इसे ठीक से बढ़ने से पहले तेज हवाओं, कड़ी धूप और भारी बारिश से बचाना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इनसे फसल को बचाने के लिए किसानों को क्रॉप कवर का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पौधा सुरक्षित रहता है और उसका विकास भी ठीक से होता है।

ये भी पढ़ें - अच्छी पैदावार के लिए 10 अप्रैल तक कर सकते हैं गन्ने की बुवाई, किसान इन बातों का भी रखें ध्यान

क्रॉप कवर क्या होता है?
क्रॉप कवर पॉलीप्रोपाइलीन कणों से बना एक गैर-बुना कपड़ा है, जिसे नाज़ुक केले के पौधों को कड़ी धूप, तेज़ हवाओं और ठंडे मौसम से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पौधे के चारों ओर एक सूक्ष्म जलवायु बनाता है, जिससे पौध किसी भी परिस्थिति में पनप सकता है। आप चाहें तो छाया और जैविक गीली घास के लिए अखबार या सनई जैसे प्राकृतिक पौधों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे फसल को गर्मी और ठंड से सुरक्षा मिलती है। और यह बेहतर विकास के लिए सूक्ष्म जलवायु बनाता है।

11-13 महीने में फ़सल तैयार
आपको बता दें कि महाराष्ट्र (जलगांव, धुले, सोलापुर) और मध्य प्रदेश (बुरहानपुर, धार, बड़वानी) के किसान इस तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं। G9 केले की किस्म को उभरी हुई क्यारियों और ड्रिप सिंचाई का उपयोग करके व्यापक रूप से उगाया जाता है, जिससे सामान्य 14-18 महीनों की तुलना में 11-13 महीने की कम कटाई अवधि मिलती है। सनई का पौधा छाया प्रदान करता है और एक बार कट जाने पर, हरी खाद के रूप में काम करता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है।

आंध्र प्रदेश केले का सबसे बड़ा उत्‍पादक
भारत में आंध्र प्रदेश केले का सबसे बड़ा उत्‍पादक राज्‍य है। यहां की मुख्‍य फसल केला है। इसके पश्‍चात महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश हैं। ये पांच राज्‍यों ने वित्तीय वर्ष 2022-2023 में भारत के केला उत्पादन में सामूहिक रूप से लगभग 67 प्रतिशत का योगदान दिया।

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