Skip to content
News Potli
एग्री बुलेटिन

केले की फसल पर काला सिगाटोका रोग का खतरा, बिहार कृषि विभाग ने किसानों को दी अहम सलाह

बिहार सरकार ने किसानों को चेताया है कि केले की फसल में काला सिगाटोका नामक फफूंदजनित रोग तेज़ी से फैल रहा है। यह रोग पत्तियों पर काले धब्बे और धारियाँ बनाता है, जिससे फल समय से पहले पककर खराब हो जाते ह

NP

Pooja Rai· Correspondent

27 अगस्त 2025· 2 min read

केले की फसल पर काला सिगाटोका रोग का खतरा, बिहार कृषि विभाग ने किसानों को दी अहम सलाह

केले की फसल पर काला सिगाटोका रोग का खतरा, बिहार कृषि विभाग ने किसानों को दी अहम सलाह

बिहार कृषि विभाग ने किसानों को चेताया है कि केले की फसल में काला सिगाटोका नामक फफूंदजनित रोग तेज़ी से फैल रहा है। यह रोग पत्तियों पर काले धब्बे और धारियाँ बनाता है, जिससे फल समय से पहले पककर खराब हो जाते हैं और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। कृषि विभाग ने बचाव के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% का छिड़काव करने की सलाह दी है। बिहार केले की खेती में अहम भूमिका निभाता है और हर साल लगभग 14.57 लाख टन उत्पादन करता है, जो देश के कुल उत्पादन का 4–5% है।

बिहार सरकार ने केला किसानों के लिए अहम सलाह जारी की है। राज्य के कृषि विभाग ने कहा है कि केले की फसल में काला सिगाटोका रोग तेजी से फैल रहा है, जो एक फफूंदजनित रोग है। इसकी वजह से केले की पत्तियों पर काले धब्बे और धारियाँ बनने लगती हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो फल समय से पहले पककर खराब हो जाते हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

बीमारी के लक्षण

पत्तियों के निचले हिस्से पर काले धब्बे और लाइनें

बरसात और नमी वाले मौसम में तेजी से फैलाव

केले का फल पूरी तरह पकने से पहले ही सूख जाना

किसानों को सही दाम पर फसल नहीं मिल पाना

ये भी पढ़ें - बिहार सरकार का बड़ा फैसला, किसान सलाहकारों का बढ़ा मानदेय

बचाव के उपाय
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि रोग से बचाव के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% घुलनशील पाउडर को 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
किसान अगर समय रहते काला सिगाटोका रोग को नियंत्रित कर लें, तो उनकी फसल सुरक्षित रहेगी और बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी। साथ ही केला खेती की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फसल किसानों की स्थायी आय का भरोसेमंद जरिया साबित हो सकती है।

बिहार में केले की खेती
बिहार भारत में केला उत्पादन का एक अहम राज्य है, जहाँ वैशाली, समस्तीपुर, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर खेती होती है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में हर साल लगभग 14.57 लाख टन केला उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 4–5% है। यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और गंगा के मैदानी इलाकों की जलवायु केले की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है।

ये देखें -

NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min