News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. आलू की खेती की मास्टरक्लास, जय सिंह की 40 साल की खेती का अनुभव
एग्री बुलेटिन

आलू की खेती की मास्टरक्लास, जय सिंह की 40 साल की खेती का अनुभव

उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले के प्रगतिशील किसान जय सिंह 40 साल से आलू और केले की खेती कर रहे हैं। वे खेत को तीन बार रोटावेटर से तैयार कर गोबर की खाद डालते हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में 12–15 क्वि

NP

Pooja Rai·Correspondent·28 Aug 2025· 3 min read

आलू की खेती की मास्टरक्लास, जय सिंह की 40 साल की खेती का अनुभव

आलू की खेती की मास्टरक्लास, जय सिंह की 40 साल की खेती का अनुभव

उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले के प्रगतिशील किसान जय सिंह 40 साल से आलू और केले की खेती कर रहे हैं। वे खेत को तीन बार रोटावेटर से तैयार कर गोबर की खाद डालते हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में 12–15 क्विंटल बीज आलू (40–50 ग्राम) लगता है, जिसे उपचार के बाद बोया जाता है। पहली सिंचाई हल्की और बाद में पौधों की छतरी बनने पर पानी दिया जाता है। खाद में NPK, यूरिया, मैग्नीशियम और जिंक का संतुलन उनकी पैदावार को बेहतर बनाता है।

उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले के प्रगतिशील किसान जय सिंह पिछले 40 साल से आलू और केले की खेती कर रहे हैं। अपने लंबे अनुभव से उन्होंने ऐसी तकनीकें विकसित की हैं जिनसे आलू की फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है। आइए जानते हैं उनकी सफल खेती का राज़।

खेत की तैयारी
जय सिंह पहले केले की फसल काटने के बाद खेत को तीन बार रोटावेटर से जोतते हैं। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और वह नरम हो जाती है। इसके बाद वे प्रति एकड़ 500–600 घनफुट गोबर की खाद डालते हैं ताकि मिट्टी उपजाऊ हो सके।

बेड बनाना
फसल को अच्छी नमी और पानी की निकासी मिले, इसके लिए वे ज़मीन से करीब 11 इंच ऊँचे बेड बनाते हैं। इस तरीके से बीज सही जगह जमते हैं और सिंचाई भी आसानी से हो जाती है।

बुवाई का सही समय
जय सिंह ने बुवाई के लिए तीन समय बताया है। पहला समय: 21 से 28 अक्टूबर, दूसरा समय: 28 अक्टूबर से 5 नवंबर और अंतिम समय: 5 से 10 नवंबर । उनका मानना है कि इन तारीखों में बुवाई करने से फसल पर मौसम का कम असर पड़ता है और पौधे अच्छे से बढ़ते हैं।

ये भी पढ़ें - केले की फसल पर काला सिगाटोका रोग का खतरा, बिहार कृषि विभाग ने किसानों को दी अहम सलाह

बीज का चुनाव और उपचार
वे सलाह देते हैं कि बीज आलू 40–50 ग्राम का होना चाहिए। एक एकड़ के लिए लगभग 12–15 क्विंटल (30,000 आलू) की ज़रूरत पड़ती है। बुवाई से पहले बीजों पर Emesto Prime छिड़का जाता है और फिर Dithane M45 व प्लास्टर ऑफ पेरिस से उपचार किया जाता है। बीजों को छाँव में सुखाकर बोना चाहिए।

सिंचाई की तकनीक
पहली सिंचाई में पानी इतना दिया जाता है कि बेड की ऊँचाई का लगभग एक-तिहाई (35%) हिस्सा गीला हो जाए। 15 दिसंबर के बाद जब पौधों की छतरी (canopy) बनने लगती है, तब नियमित सिंचाई की जाती है ताकि पौधे स्वस्थ रहें और फैल सकें।

खाद डालने की विधि
जय सिंह का खाद डालने का तरीका भी खास है। उन्होंने बताता कि NPK (12:32:16) – 3 बोरी प्रति एकड़, यूरिया – 1 बोरी शुरुआत में और 45 दिन बाद 1 बोरी और मैग्नीशियम व जिंक – 20–20 किलो प्रति एकड़ डालें।

जय सिंह की इन तकनीकों ने उन्हें एक सफल किसान बना दिया है। उनकी मेहनत और अनुभव किसानों के लिए मिसाल हैं, जिससे वे भी बेहतर पैदावार लेकर अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं।

वीडियो देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— आलू की खेती की मास्टरक्लास, जय सिंह की 40 साल की खेती का अनुभव

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
agriculture newskheti kisaniNews Potlipotato farminguttar pradeshखेती किसानी
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 Feb 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·09 Feb 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·09 Feb 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs