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“आम आदमी के वैज्ञानिक” माधव गाडगिल का निधन, भारत ने खोया एक महान पर्यावरण वैज्ञानिक

“आम आदमी के वैज्ञानिक” कहे जाने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद् और पद्म पुरस्कार से सम्मानित माधव गाडगिल का 7 जनवरी 2026 को पुणे में 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने भारत में पर्यावरण संरक्षण, जैव

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Pooja Rai· Correspondent

8 जनवरी 2026· 2 min read

Champions of the Earthecologistenvironmentalists
“आम आदमी के वैज्ञानिक” माधव गाडगिल का निधन, भारत ने खोया एक महान पर्यावरण वैज्ञानिक

“आम आदमी के वैज्ञानिक” माधव गाडगिल का निधन, भारत ने खोया एक महान पर्यावरण वैज्ञानिक

“आम आदमी के वैज्ञानिक” कहे जाने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद् और पद्म पुरस्कार से सम्मानित माधव गाडगिल का 7 जनवरी 2026 को पुणे में 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने भारत में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और पश्चिमी घाटों के संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान दिया।

प्रख्यात पारिस्थितिकीविद् और “आम आदमी के वैज्ञानिक” के नाम से मशहूर माधव गाडगिल का 7 जनवरी 2026 को पुणे में निधन हो गया। वे 83 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य कारणों से संघर्ष कर रहे थे। उन्हें पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में किये काम के लिए देश और दुनिया में सराहा जाता था।

Champions of the Earth पुरस्कार विजेता
गाडगिल ने Centre for Ecological Sciences की स्थापना की थी और भारत में पहली बायोस्फीयर रिज़र्व स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले, जिनमें United Nations Environment Programme (UNEP) का Champions of the Earth पुरस्कार भी शामिल है — यह पर्यावरण के क्षेत्र में यूएन का सबसे बड़ा सम्मान है।

ये भी पढ़ें - Auri Grow India ने लॉन्च किया CarbonKrishi, जानें ये है क्या?

पश्चिमी घाटों के संरक्षण पर काम किया
वे दशकों से पश्चिमी घाटों के संरक्षण पर काम कर रहे थे और Western Ghats Ecology Expert Panel (गाडगिल आयोग) के अध्यक्ष भी रहे। 2011 में उनके नेतृत्व में बनी रिपोर्ट ने पश्चिमी घाट की संरक्षण जरूरतों को उजागर किया और देश भर में पर्यावरण सुरक्षा के लिए बड़ी बहस छेड़ी।

पर्यावरणीय जागरूकता को आगे बढ़ाया
गाडगिल ने स्थानीय समुदायों, विज्ञान और नीति निर्माण को जोड़ते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को आगे बढ़ाया। उन्होंने जंगलों, कृषि-आधारित इलाकों और पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक शोध, कानून और जनसम्मिलन को एक साथ लाया।

साल 2022 में News Potli को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने पश्चिमी घाट, कोंकण क्षेत्र, पर्यावरण, विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और व्यावहारिक राय दी थी।
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