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असम के चाय किसानों के लिए खुशखबरी, केंद्र की मदद से किसान 5% चाय बागानों पर करेंगे ऑयल पाम की खेती

केंद्र सरकार ने असम के चाय बागानों को अपने प्रमुख ऑयल पाम मिशन का लाभ उठाने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय उत्तर-पूर्वी चाय संघ के अनुरोध के बाद लिया गया है। उत्तर-पूर्वी चाय संघ ने 4 फरवरी 2025 को कें

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Pooja Rai· Correspondent

4 अप्रैल 2025· 2 min read

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असम के चाय किसानों के लिए खुशखबरी, केंद्र की मदद से किसान 5% चाय बागानों पर करेंगे ऑयल पाम की खेती

असम के चाय किसानों के लिए खुशखबरी, केंद्र की मदद से किसान 5% चाय बागानों पर करेंगे ऑयल पाम की खेती

केंद्र सरकार ने असम के चाय बागानों को अपने प्रमुख ऑयल पाम मिशन का लाभ उठाने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय उत्तर-पूर्वी चाय संघ के अनुरोध के बाद लिया गया है। उत्तर-पूर्वी चाय संघ ने 4 फरवरी 2025 को केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखकर असम के चाय बागानों को इस योजना के दायरे में लाने की अपील की थी। आपको बता दें कि भारत खाद्य तेलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पाम ऑयल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में NMEO-OP मिशन से स्वदेशी खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने और आयात खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।

ऑयल पाम की खेती के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, खासकर पहले चार वर्षों में जब फसल तैयार नहीं होती। चाय उद्योग को उम्मीद है कि केंद्र सरकार की NMEO-OP मिशन के तहत मिलने वाली सहायता से उनकी मौजूदा आर्थिक चुनौतियों को हल करने में मदद मिलेगी। उत्तर पूर्वी चाय संघ(NETA) के सलाहकार बिद्यानंद बरकाकोटी के मुताबिक चाय बागानों में ऑयल पाम लगाने से उद्योग को मजबूती मिलेगी।
NETA ने अपने अध्ययन में पाया कि चाय और ऑयल पाम की खेती को संतुलित रूप से किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर चाय बागानों की 5 फीसदी भूमि पर अगर पेड़, ऑयल पाम और अन्य नकदी फसलों की खेती की जाए, तो यह उद्योग की आर्थिक स्थिति को सुधारने में कारगर साबित हो सकता है। असम सरकार ने अक्तूबर 2022 में चाय बागानों की 5 फीसदी भूमि पर नकदी फसल उगाने की अनुमति दी थी। इसके बाद जनवरी 2025 में असम कैबिनेट ने ऑयल पाम को नकदी फसल के रूप में मान्यता दी।

ये भी पढ़ें - सरकार ने 25 मार्च तक MSP पर खरीदा 99.41 लाख गांठ कपास, मंत्री ने राज्यसभा में दी जानकारी

क्या है राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ऑयल पाम (NMEO-OP)?
इस योजना के तहत किसानों और बागान मालिकों को रोपण सामग्री, चार साल तक की देखभाल, सहायक फसल के लिए इनपुट, भूमि समतलीकरण, बायो-फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई, बोरवेल/पंप सेट/जल संचयन संरचना/वर्मी कंपोस्ट इकाई, कटाई के उपकरण जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इसमें विशेष पैकेज भी शामिल है। यह योजना 2025-26 तक लागू रहेगी।

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