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अमेरिकी दालों पर 30% शुल्क, भारत–US ट्रेड डील पर बढ़ा तनाव

भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों, खासकर पीली मटर पर 30% आयात शुल्क लगा दिया है। इससे अमेरिका के सांसदों और किसानों में नाराजगी है, क्योंकि भारत अमेरिकी दालों का बड़ा बाजार है। अमेरिका का कहना है कि इ

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Pooja Rai· Correspondent

19 जनवरी 2026· 3 min read

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अमेरिकी दालों पर 30% शुल्क, भारत–US ट्रेड डील पर बढ़ा तनाव

अमेरिकी दालों पर 30% शुल्क, भारत–US ट्रेड डील पर बढ़ा तनाव

भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों, खासकर पीली मटर पर 30% आयात शुल्क लगा दिया है। इससे अमेरिका के सांसदों और किसानों में नाराजगी है, क्योंकि भारत अमेरिकी दालों का बड़ा बाजार है। अमेरिका का कहना है कि इस फैसले से उनके किसानों को नुकसान होगा, जबकि भारत इसे घरेलू किसानों की सुरक्षा और दाम नियंत्रण के लिए जरूरी बता रहा है।

अमेरिका और भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ता में अब दालों (पल्सेज) को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। अमेरिका के सांसदों ने भारत पर अमेरिकी दालों पर अधिक आयात शुल्क लगाने का आरोप लगाया है, जबकि भारत सरकार घरेलू किसानों के हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संतुलन साधने की बात कह रही है।

दरअसल, भारत–अमेरिका व्यापार समझौता पहले ही देरी का सामना कर रहा है और अब दालें इस बातचीत में एक नया विवादित मुद्दा बनकर उभरी हैं। अमेरिका के दो रिपब्लिकन सांसद—केविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) और स्टीव डाइन्स (मोंटाना)—ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। सांसदों का आरोप है कि भारत ने अमेरिकी दालों पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगाकर अमेरिकी किसानों के साथ अन्याय किया है।

अमेरिकी किसानों को नुकसान का दावा
नॉर्थ डकोटा और मोंटाना अमेरिका के प्रमुख दाल उत्पादक राज्य हैं, जहां मटर, मसूर और अन्य दालों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। सांसदों का कहना है कि भारत अमेरिकी दालों के लिए एक बेहद अहम बाजार है, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता है और वैश्विक खपत का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत का है। ऐसे में ऊंचा आयात शुल्क अमेरिकी किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को कमजोर करता है।

सांसदों के अनुसार, भारत ने 30 अक्टूबर को अमेरिकी पीली मटर (येलो पीज़) पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया, जो 1 नवंबर से लागू हो गया। उनका कहना है कि भारत में मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर जैसी दालों की सबसे ज्यादा खपत होती है, इसके बावजूद अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैक्स लगाया गया है।

ये भी पढ़ें - घरेलू भंडार मजबूत, सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को दी मंजूरी

भारत का पक्ष और ‘खामोश जवाबी कार्रवाई’
भारत सरकार का कहना है कि अमेरिका से आने वाली दालों पर लगाया गया यह शुल्क घरेलू किसानों की सुरक्षा और देश में दालों की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी है। इस 30 प्रतिशत शुल्क में 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 20 प्रतिशत कृषि उपकर (एग्रीकल्चर सेस) शामिल है। यह फैसला कई महीनों तक दालों के बिना शुल्क आयात के बाद लागू किया गया है।

वहीं, व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की ओर से पहले लगाए गए टैरिफ के जवाब में की गई एक तरह की “खामोश जवाबी कार्रवाई” भी हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले साल अमेरिका ने भारत के कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया था। दालों पर शुल्क को उसी का जवाब माना जा रहा है, जिसे बिना ज्यादा प्रचार के लागू किया गया।

व्यापार संबंधों पर असर की आशंका
हालांकि दालों का यह मुद्दा देखने में सीमित लगता है, लेकिन इससे भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता और अधिक जटिल हो सकती है। दोनों देश इस समय घरेलू आर्थिक दबावों और वैश्विक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में दालों पर यह विवाद आने वाले दिनों में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

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