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अब कृषि योजनाएं बंद कमरों में नहीं,  खेतों में बनेंगी: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों के साथ

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Pooja Rai· Correspondent

12 जून 2025· 4 min read

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अब कृषि योजनाएं बंद कमरों में नहीं,  खेतों में बनेंगी: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

अब कृषि योजनाएं बंद कमरों में नहीं,  खेतों में बनेंगी: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों के साथ दिल्ली के बाहरी इलाके स्थित तिगिपुर गांव का दौरा कर किसानों से संवाद किया। इस अभियान के जरिए किसानों की समस्याएं सुनने, किसान-वैज्ञानिक संवाद स्थापित करने और कृषि में प्रौद्योगिकी को तेज गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले तिगिपुर में किसान चौपाल में किसानों से बातचीत की। जहां उन्होंने बीज उत्पादन, पॉलीहाउस खेती, स्ट्रॉबेरी उत्पादन और अन्य उच्च मूल्य फसलों से जुड़े उत्पादन को लेकर किसानों से संवाद किया। उन्होंने नवाचार करने वाले किसानों के अनुभव को जाना और उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसान देश की नई खेती के अग्रदूत हैं।उन्होंने ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन देखा जिसमें कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिड़काव की आधुनिक विधियों को प्रस्तुत किया गया। उन्होंने वैज्ञानिकों से तकनीक की लागत, प्रभावशीलता और अनुकूलन के बारे में जानकारी ली।

अनुसंधान बंद कमरों में नहीं, खेतों में किसानों के साथ मिलकर होगा
सभा को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि अब अनुसंधान बंद कमरों में नहीं, खेतों में किसानों के साथ मिलकर होगा। वैज्ञानिक गांव-गांव पहुंचकर जो फीडबैक लाएंगे, उसी के आधार पर किसानों के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछले 15 दिनों में देशभर में आईसीएआर की 2,170 टीमों ने किसानों के बीच जाकर तकनीक और शोध संबंधी जागरूकता फैलाई है। किसानों की समस्याओं को सुनकर जो समाधान मिल सके, उसके लिए त्वरित कार्य किया गया है और बाकी पर गंभीरता से प्रयास जारी हैं।

ये भी पढ़ें - देश के सरकारी गोदामों में चावल का रिकॉर्ड स्टॉक, गेहूं का स्टॉक भी पिछले चार साल में सबसे ज़्यादा

मिट्टी की जांच अवश्य कराएं
कृषि मंत्री ने किसानों को मिट्टी की घटती उर्वरता पर बात की और आग्रह किया कि “मिट्टी की जांच अवश्य कराएं, और सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर फसल का चयन करें। यही टिकाऊ कृषि का आधार है।” उन्होंने बताया कि सरकार का विशेष फोकस अब फसल विविधीकरण, बाजारोन्मुखी खेती, और बागवानी आधारित मॉडल पर है। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे क्षेत्रों को बागवानी हब के रूप में विकसित किया जा सकता है क्योंकि यहां बाजार की उपलब्धता बहुत मजबूत है।उन्होंने कहा कि अब तकनीक के बिना खेती में प्रतिस्पर्धा संभव नहीं। खेती हो या मार्केटिंग – दोनों में किसानों को प्रौद्योगिकी का सहयोग लेना होगा। केंद्र सरकार इसके लिए हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने कहा कि
शिवराज सिंह ने कहा कि अब-तक दिल्ली के किसान केंद्र सरकार की कई योजनाओं से वंचित थे, लेकिन अब यह स्थिति बदलेगी। दिल्ली के किसान अब आत्मनिर्भर भारत के सपनों में पूरी भागीदारी निभाएंगे। केंद्र की हर कृषि योजना का लाभ अब दिल्ली के किसानों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं हैं जिनमें प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), मूल्य समर्थन योजना, मूल्य घाटा भुगतान योजना, बाजार हस्तक्षेप योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना व अन्य प्रावधान जिनमें अनुदान देना, पाली हाउस और ग्रीन हाउस बनाने के लिए केंद्र से सब्सिडी शामिल हैं, जिससे अब-तक दिल्ली के किसान वंचित रहे हैं। इसके साथ ही परंपरागत कृषि विकास योजना, नए बाग लगाने के लिए योजना, पुराने बागों के जीर्णोद्धार के लिए योजना, नर्सरी के लिए योजना सब्सिडी की योजनाएं, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाओं का लाभ भी दिल्ली के किसानों तक नहीं पहुंच पाया है। लेकिन अब ये सारी योजनाएं दिल्ली में लागू की जाएंगी। दिल्ली सरकार से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है। इलेक्ट्रॉनिक कांटे व खाद की खरीद के लिए भी मदद की जाएगी। किसान अपनी खून-पसीने से देश के अन्न भंडार भर रहे हैं। अपने किसानों की उन्नति के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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