उत्तर प्रदेश में खेती में पानी का बेहतर इस्तेमाल करने और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की टीम कृषि से जुड़े अलग-अलग मॉडल का जायजा ले रही है। इसी कड़ी में वर्ल्ड बैंक के 2030 वाटर रिसोर्सेज ग्रुप, FAO और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित युवा किसान अनुष्का जायसवाल के फार्म का दौरा किया।
इस दौरे में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और माइक्रो इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) व प्रोटेक्टेड कल्टिवेशन (संरक्षित खेती) के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।
संरक्षित खेती और पानी बचाने के तरीकों पर चर्चा
दौरे का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में संरक्षित खेती की संभावनाओं को समझना और कृषि में पानी का बेहतर इस्तेमाल करने वाले तरीकों को देखना है। संरक्षित खेती के तहत पॉलीहाउस और नेट हाउस जैसी संरचनाओं में फसल उगाई जाती है। वहीं, माइक्रो इरिगेशन में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों से जरूरत के मुताबिक फसलों तक पानी पहुंचाया जाता है।

विश्व बैंक के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने और किसानों तक इस तकनीक की पहुंच आसान बनाने के लिए राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। इससे पानी की बचत करने और खेती की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
रायबरेली में धान की सीधी बुवाई का भी लेंगे जायजा
लखनऊ के बाद टीम रायबरेली जाएगी। यहां माइक्रो इरिगेशन के साथ डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) यानी धान की सीधी बुवाई की तकनीक का जायजा लिया जाएगा। इस तरीके में धान की पौध तैयार करके रोपाई करने के बजाय बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। इससे पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी और मजदूरी की बचत हो सकती है।
विश्व बैंक के अनुसार, उत्तर प्रदेश में DSR और माइक्रो इरिगेशन जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, ताकि खेती में पानी का इस्तेमाल बेहतर हो और किसानों की लागत कम करने में मदद मिले।

इस दौरे के जरिए राज्य में ऐसी कृषि तकनीकों की संभावनाओं को समझने पर जोर है, जो किसानों को कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल करने और पानी की बचत करने में मदद कर सकें।
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