भारत में खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है। खेतों में बुवाई और रोपाई से लेकर फसल की कटाई, पशुपालन, बीजों को सुरक्षित रखने और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग तक महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। खेती में महिलाओं की भागीदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान कृषि गतिविधियों में लगे कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 59.8% रही। यह आंकड़ा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) पर आधारित है।
हर साल 15 अक्टूबर को महिला किसान दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य खेती में महिलाओं के योगदान को पहचान देना और कृषि क्षेत्र में उनके लिए बेहतर अवसर, संसाधन और अधिकार सुनिश्चित करने पर ध्यान दिलाना है। हालांकि, खेती में अहम भूमिका निभाने के बावजूद कई महिला किसानों को जमीन के मालिकाना हक, कृषि ऋण, आधुनिक तकनीक और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं की भागीदारी और जमीन पर हक
कृषि जनगणना 2015-16 के मुताबिक, देश में खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली कुल कृषि भूमि के 13.78% हिस्से का संचालन महिलाएं करती थीं। यानी खेती में महिलाओं की बड़ी भागीदारी के बावजूद, जमीन के संचालन में उनकी हिस्सेदारी काफी कम थी। ध्यान रहे कि यह आंकड़ा 2015-16 का है, जबकि महिलाओं के कार्यबल से जुड़ा 59.8% का आंकड़ा वर्ष 2025 का है।
जमीन पर अधिकार होने से महिला किसानों को खेती से जुड़े फैसले लेने, कृषि ऋण प्राप्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है। इसलिए खेती में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें संसाधनों और अधिकारों तक बेहतर पहुंच देना भी जरूरी है।
महिला किसानों के लिए चल रही हैं योजनाएं
महिला किसानों को खेती में आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रशिक्षण, तकनीक और आर्थिक अवसरों से जुड़ी योजनाएं चला रही है। कृषि मंत्रालय की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में 28 फरवरी 2026 तक कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) के तहत 11.61 लाख से ज्यादा महिला किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
इसके अलावा, नमो ड्रोन दीदी योजना के जरिए महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन तकनीक से जोड़ने की पहल की गई है। इस योजना के तहत महिलाएं खेती में ड्रोन से कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट के छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय के नए अवसर तलाश सकती हैं।
महिला किसान दिवस 2026 की थीम क्या है?
महिला किसान दिवस 2026 की थीम “विकसित कृषि और विकसित भारत के निर्माण में महिला किसानों की भूमिका” है। इसका उद्देश्य खेती में महिलाओं के नेतृत्व, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण, पशुपालन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनके योगदान को पहचान देना है।
साल 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में भी घोषित किया है। इसका उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रणाली में महिलाओं के योगदान को पहचान देना और उन्हें संसाधनों, तकनीक तथा आर्थिक अवसरों तक बेहतर पहुंच दिलाने पर ध्यान केंद्रित करना है।
महिला किसानों को समान अवसर देना जरूरी
महिला किसान दिवस सिर्फ महिलाओं के योगदान को सम्मान देने का दिन नहीं है, बल्कि यह खेती में उनकी स्थिति पर ध्यान देने का अवसर भी है। आंकड़े बताते हैं कि कृषि क्षेत्र में महिलाएं बड़ी संख्या में काम कर रही हैं। ऐसे में उन्हें जमीन पर अधिकार, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, कृषि ऋण और बाजार तक बेहतर पहुंच देना जरूरी है। इससे न सिर्फ महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है, बल्कि खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सकता है।





