खेती की बात होती है तो अक्सर किसान के तौर पर पुरुषों का नाम सामने आता है, लेकिन खेत में बीज डालने से लेकर फसल काटने, निराई-गुड़ाई और पशुपालन तक महिलाओं की बड़ी भूमिका होती है। इसी योगदान को पहचान दिलाने और महिला किसानों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए 30 सितंबर को नई दिल्ली में अखिल भारतीय महिला किसान श्रमिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
यह सम्मेलन भारतीय किसान संघ (BKS) की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर के अलग-अलग राज्यों से हजारों महिला किसान और महिला कृषि श्रमिक शामिल होंगी। खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने साल 2026 को International Year of the Woman Farmer घोषित किया है और इसी मौके पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली महिला किसानों का होगा सम्मान
सम्मेलन में खेती और उससे जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा काम करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से चुनी गई महिला किसानों को गौ कृषि वाणिज्यम, जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, रोजगार और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में उनके काम के लिए सम्मान मिलेगा।
खेती के ज्यादातर कामों में महिलाओं की बड़ी भूमिका
भारतीय किसान संघ के मुताबिक, भारत में महिलाएं खेती से जुड़े करीब 60 से 80 फीसदी कामों में हिस्सा लेती हैं। इसमें बुवाई, रोपाई, फसल कटाई, खरपतवार नियंत्रण और पशुपालन जैसे काम शामिल हैं।
महिलाएं पीढ़ियों से खेती से जुड़ी पारंपरिक जानकारी, देशी बीज और जैव विविधता को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं।
जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में भी आगे
BKS के मुताबिक, महिलाएं गौ आधारित जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके साथ ही खेती, डेयरी और ग्रामीण हस्तशिल्प के जरिए वे अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
महिलाएं अब सिर्फ खेत में काम करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती के प्रबंधन और परिवार से जुड़े कृषि फैसलों में भी सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।
BKS के 60 हजार से ज्यादा गांवों में संगठन
भारतीय किसान संघ के मुताबिक, उसके गांव स्तर के संगठन देश के 60 हजार से ज्यादा गांवों में हैं। संगठन में करीब 42 लाख किसान महिला और पुरुष सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें लगभग 7 लाख महिला किसान श्रमिक शामिल हैं।
30 सितंबर को होने वाला यह सम्मेलन खेती में महिलाओं के योगदान को सामने लाने और उनके काम को किसान के रूप में पहचान दिलाने पर केंद्रित रहेगा।





