खेती में अच्छी पैदावार के लिए किसान नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों पर ध्यान देते हैं, लेकिन सल्फर (Sulphur) भी फसलों के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है। इसकी कमी से पौधों की बढ़वार, पैदावार और फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। खासकर सरसों, सोयाबीन और दूसरी तिलहनी फसलों के लिए सल्फर की पर्याप्त मात्रा जरूरी है। ICAR की पत्रिका Indian Farming में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, सल्फर पौधों में प्रोटीन बनने और उनके विकास में अहम भूमिका निभाता है।
फसलों के लिए सल्फर क्यों जरूरी है?
1. तेल की मात्रा और गुणवत्ता के लिए
सरसों, मूंगफली और सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों में सल्फर तेल बनने की प्रक्रिया में मदद करता है। इसकी कमी होने पर बीजों की उपज और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
2. प्रोटीन बनाने में मदद
सल्फर पौधों में प्रोटीन बनाने के लिए जरूरी अमीनो एसिड का हिस्सा है। इसलिए दलहनी फसलों समेत कई फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए इसकी जरूरत होती है।
3. पौधों की बढ़वार के लिए जरूरी
सल्फर पौधों की कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं में हिस्सा लेता है। इसकी कमी होने पर पौधों की बढ़वार धीमी हो सकती है और फसल पकने में देरी हो सकती है।
फसल में सल्फर की कमी कैसे पहचानें?
सल्फर की कमी होने पर पौधों की नई पत्तियां पीली पड़ सकती हैं और उनकी बढ़वार प्रभावित हो सकती है। हालांकि, पत्तियों का पीला पड़ना दूसरे पोषक तत्वों की कमी से भी हो सकता है। इसलिए सही पहचान के लिए मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
खेत में सल्फर की कमी कैसे पूरी करें?
किसान मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर जिप्सम या सल्फर युक्त उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। सही मात्रा फसल, मिट्टी और उर्वरक के प्रकार पर निर्भर करती है। बिना जरूरत सल्फर डालने से पैदावार बढ़ने की गारंटी नहीं है।
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