इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई है, लेकिन इसके बावजूद रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की बुवाई का रकबा पिछले साल के आसपास रहने की उम्मीद है। ऐसे में देश में एक बार फिर गेहूं की बंपर पैदावार हो सकती है। कृषि मंत्रालय ने इस साल 12.1 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले साल रिकॉर्ड 12.07 करोड़ टन उत्पादन हुआ था। अब सवाल है कि कम बारिश के बावजूद गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद क्यों की जा रही है?
सिंचाई की सुविधा से कम होगा कम बारिश का असर
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एमएल जाट के मुताबिक, गेहूं उत्पादक प्रमुख राज्यों में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है। इससे मानसून में कम बारिश होने के बावजूद गेहूं की बुवाई पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं है।
इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश सामान्य से 6 फीसदी कम रही, जबकि मध्य भारत में 3 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि, अक्टूबर में हुई बारिश से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में खेतों की नमी बेहतर हुई है। इससे उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बुवाई के लिए खेत तैयार करने में मदद मिल सकती है।
गेहूं को धान की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है। साथ ही, प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में सिंचाई की सुविधा होने से फसल पर बारिश की कमी का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।
इन राज्यों में होती है गेहूं की ज्यादा खेती
भारत में गेहूं की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और गुजरात में होती है। गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है। इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर में की जाती है, जबकि फसल मार्च और अप्रैल में तैयार होती है।
पिछले रबी सीजन 2025-26 में गेहूं की खेती 3.36 करोड़ हेक्टेयर में हुई थी। इस साल भी बुवाई का रकबा लगभग इसी स्तर पर रहने की उम्मीद है। हालांकि, उत्पादन कितना होगा, यह आने वाले महीनों में मौसम, फसल की स्थिति और पैदावार पर निर्भर करेगा।
सरकारी गोदामों में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक
देश में गेहूं का सरकारी भंडार भी अच्छी स्थिति में है। 16 सितंबर तक केंद्रीय पूल में 474.4 लाख टन गेहूं मौजूद था, जबकि तय बफर स्टॉक की जरूरत 275.8 लाख टन है। यानी सरकारी गोदामों में जरूरत से काफी ज्यादा गेहूं उपलब्ध है। इससे सरकार को खाद्य सुरक्षा योजनाओं के लिए अनाज उपलब्ध कराने और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। पिछले सीजन में यह 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था।





