खेती में अच्छी पैदावार के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता वाली फसल तैयार करना आज किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र में SOMS (Soluble Fertilizers, Organic Fertilizers, Micronutrients and Bio-Stimulants) मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल को अपनाकर किसान फसल की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत भी बेहतर बना सकते हैं।
क्या है SOMS मॉडल?
SOMS एक ऐसा पोषण प्रबंधन मॉडल है, जिसमें पानी में घुलनशील उर्वरक (Soluble Fertilizers), जैविक उर्वरक (Organic Fertilizers), सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और बायो-स्टिमुलेंट्स (Bio-Stimulants) का संतुलित और जरूरत के अनुसार उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य फसल को सही समय पर सही मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराना है, ताकि पौधों का विकास बेहतर हो और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़े।
किसानों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, SOMS मॉडल अपनाने से फसल में पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं, उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है और फलों व सब्जियों की शेल्फ लाइफ (भंडारण क्षमता) भी बेहतर होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
सिर्फ उर्वरक नहीं, पानी की गुणवत्ता भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी फसल के लिए केवल उर्वरकों का सही इस्तेमाल ही काफी नहीं है। सिंचाई के पानी का pH, उर्वरकों और कीटनाशकों की गुणवत्ता, तथा एकीकृत फसल प्रबंधन (Integrated Crop Management) भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन सभी बातों का ध्यान रखने से किसानों को बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता वाली उपज मिल सकती है।
निर्यात के लिए भी होगा फायदेमंद
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान आधुनिक पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाते हैं, तो उनकी उपज घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी बेहतर साबित हो सकती है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और भारतीय कृषि को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
SFIA निभा रहा अहम भूमिका
Soluble Fertilizer Industry Association (SFIA) घुलनशील और विशेष उर्वरकों से जुड़े उद्योगों का संगठन है। यह संस्था नई तकनीकों को बढ़ावा देने, किसानों में जागरूकता बढ़ाने, नीति सुधारों का समर्थन करने और SOMS आधारित खेती को प्रोत्साहित करने का काम कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में आधुनिक पोषण प्रबंधन और SOMS जैसे मॉडल भारतीय खेती को अधिक टिकाऊ, लाभदायक और गुणवत्ता आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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