उत्तर प्रदेश में इस बार बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से ऊपर हो, लेकिन पूरे प्रदेश में बारिश एक जैसी नहीं हुई। कहीं बादल जमकर बरसे तो कहीं किसान बारिश का इंतजार करते रह गए। 27 सितंबर तक यूपी में सामान्य से करीब 8% ज्यादा बारिश दर्ज हुई है, लेकिन जिलेवार तस्वीर काफी अलग है। कुछ जिलों में सामान्य से 90% से ज्यादा बारिश हुई, जबकि कुछ जिलों में 60-70% तक कमी बनी हुई है।
यूपी में कुल 7.7% ज्यादा बारिश
कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 27 सितंबर तक प्रदेश में 797.1 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 739.8 मिमी होनी चाहिए थी। यानी कुल मिलाकर 7.7% ज्यादा बारिश हुई। इसके बावजूद प्रदेश के 19 जिलों में बारिश सामान्य से 20% से ज्यादा कम रही। वहीं 26 जिलों में सामान्य से 20% से ज्यादा बारिश हुई है।
कहीं 95% ज्यादा, कहीं 68% कम
जिलेवार आंकड़े बारिश की असमान तस्वीर दिखाते हैं। संभल में सामान्य से 95% ज्यादा बारिश हुई है। इसके अलावा महोबा में 91%, हमीरपुर में 86%, कानपुर नगर में 78%, बांदा में 77% और चित्रकूट में 75% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
दूसरी ओर शामली और देवरिया में सामान्य से 68% कम बारिश हुई। गाजियाबाद में 64%, कुशीनगर में 60%, भदोही में 59% और जौनपुर में 56% कमी दर्ज की गई। यानी एक ही राज्य में कहीं पानी ज्यादा है तो कहीं खेतों को पर्याप्त नमी तक नहीं मिल पाई।
चार जिलों में 40% से भी कम सामान्य बारिश
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शामली, देवरिया, गाजियाबाद और कुशीनगर में सामान्य बारिश के मुकाबले 40% से भी कम बारिश हुई। शामली में सामान्य की सिर्फ 31.8%, देवरिया में 32%, गाजियाबाद में 36.4% और कुशीनगर में 39.6% बारिश हुई है।
इसके उलट संभल में जून से अब तक सामान्य बारिश का 195%, महोबा में 191.2%, हमीरपुर में 186.4%, कानपुर नगर में 178%, बांदा में 177.3% और चित्रकूट में 174.8% बारिश दर्ज की गई है।
किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
बारिश का यह असमान बंटवारा ऐसे समय हुआ है, जब खरीफ फसलें अब पकने लगी हैं और कई जगह कटाई शुरू होने वाली है। जहां ज्यादा बारिश हुई है, वहां खेतों में पानी भरने से धान, दलहन, तिलहन और बाजरा जैसी फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। वहीं कम बारिश वाले जिलों में मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
ज्यादा बारिश वाले इलाकों में लगातार पानी और नमी के कारण पकी फसल की कटाई और उसे सुखाना मुश्किल हो सकता है। दूसरी तरफ कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
बारिश का यह अंतर सिर्फ खरीफ तक सीमित नहीं रहेगा। ज्यादा बारिश वाले खेतों में पानी भरा रहने से रबी की बुवाई में देरी हो सकती है, जबकि कम बारिश वाले इलाकों में मिट्टी में पर्याप्त नमी न होने से किसानों को बुवाई के लिए अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ सकती है।





