उत्तर प्रदेश में सितंबर की शुरुआत के साथ बारिश का दौर जारी है। ऐसे में किसानों को फसलों में पानी भरने और कीट-रोगों के बढ़ते खतरे से सावधान रहने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने अगले दो हफ्तों यानी 4 से 17 सितंबर तक के मौसम को देखते हुए किसानों, पशुपालकों और मछली पालकों के लिए जरूरी सलाह जारी की है। किसानों को खास तौर पर खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने और बारिश के दौरान सिंचाई व कीटनाशक का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी गई है।
अगले दो हफ्ते कैसा रहेगा मौसम?
उपकार की क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठक में बताया गया कि 4 से 10 सितंबर के दौरान प्रदेश के ज्यादातर कृषि क्षेत्रों में बारिश सामान्य या सामान्य से ज्यादा रह सकती है। कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक, जबकि कई क्षेत्रों में सामान्य से थोड़ा कम रहने का अनुमान है।
वहीं, 11 से 17 सितंबर के दौरान उत्तर-पूर्वी मैदानी इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। बाकी क्षेत्रों में बारिश सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है। इस दौरान ज्यादातर जगहों पर तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रह सकता है।
बारिश के बीच किसान क्या करें?
मौसम को देखते हुए किसानों को खेतों में पानी जमा न होने देने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव फिलहाल रोकना बेहतर रहेगा।
जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वहां खासकर धान की फसल में कल्ले निकलने और गांठ बनने की अवस्था में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। खेत में ज्यादा सूखापन होने पर जमीन में दरारें पड़ सकती हैं, जिससे फसल को नुकसान हो सकता है।
कम पानी वाले सब्जियों की खेती पर जोर
जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां सब्जी किसान कम पानी में तैयार होने वाली और कम अवधि की फसलों की खेती कर सकते हैं। इनमें पालक, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, मेथी और धनिया शामिल हैं।
कीट-रोग से फसल बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय
बारिश के बाद वातावरण में गर्मी और नमी बढ़ने से फसलों में कीट और रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए किसानों को पहले पर्यावरण के अनुकूल उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
किसान लाइट ट्रैप, बर्ड पर्चर, फेरोमोन ट्रैप, ट्राइकोग्रामा और ट्राइकोडर्मा जैसे उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर कीटनाशक की जरूरत पड़े तो मौसम साफ होने और हवा की रफ्तार कम रहने पर ही छिड़काव करें।
पशुपालकों के लिए भी जरूरी सलाह
पशुपालकों को पशुओं को बाहरी परजीवियों से बचाने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से दवा देने को कहा गया है। साथ ही सरकारी पशु चिकित्सालयों में खुरपका-मुंहपका और लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के लिए चल रहे मुफ्त टीकाकरण का लाभ लेने की सलाह दी गई है।
मछली पालकों के लिए भी सलाह
मौजूदा मौसम को मछली पालन के लिए अनुकूल बताया गया है। मत्स्य पालक कतला, रोहू, नैन और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों का मत्स्य बीज डाल सकते हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों से मत्स्य बीज लेने की सलाह दी गई है।
आपदा की स्थिति में यहां करें फोन
सरकार की ओर से बताया गया है कि अधिसूचित आपदा में जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। किसी भी आपात स्थिति में लोग राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम 1070 या जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम 1077 पर संपर्क कर सकते हैं।
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