उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन को लेकर अगले सीजन में चीनी मिलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य के 11 प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ने का रकबा करीब 1.6 फीसदी घट गया है। इन जिलों में प्रदेश की 20 बड़ी चीनी मिलें स्थित हैं और ये मिलें राज्य के कुल चीनी उत्पादन में करीब 68 फीसदी हिस्सेदारी रखती हैं। ऐसे में रकबा घटने के साथ अगर मिलों ने इस बार गन्ने की पेराई भी जल्दी शुरू कर दी, तो चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
वर्तमान 2025-26 सीजन में 30 सितंबर तक उत्तर प्रदेश में करीब 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। अकेली 20 बड़ी चीनी मिलों ने इसमें करीब 32.11 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें त्रिवेणी इंजीनियरिंग और DCM श्रीराम की खटौली, अज्बापुर और दौराला जैसी बड़ी मिलें शामिल हैं। इन मिलों के इलाकों को देखें तो अमरोहा, बिजनौर, बुलंदशहर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, सहारनपुर, शाहजहांपुर और सीतापुर प्रदेश के चीनी उत्पादन के लिए बेहद अहम हैं।
11 जिलों में गन्ने का रकबा घटा
आंकड़ों के मुताबिक, इन 11 जिलों में मौजूदा सीजन में करीब 60.96 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। वहीं, 2026-27 सीजन में पेराई के लिए उपलब्ध गन्ने का रकबा घटकर करीब 17.14 लाख हेक्टेयर रह गया है। सूत्रों के मुताबिक, बिजनौर और लखीमपुर खीरी को छोड़कर बाकी 9 जिलों में गन्ने का रकबा घटा है। कुछ जिलों में यह गिरावट करीब 14 फीसदी तक है, जबकि जहां रकबा बढ़ा है वहां बढ़ोतरी करीब 0.5 फीसदी ही है।
चीनी मिलों की ओर से पेराई का काम जल्दी शुरू करने की तैयारी भी इस स्थिति को और महत्वपूर्ण बना रही है। गन्ना विशेषज्ञ के मुताबिक, अगर पेराई जल्दी शुरू होती है तो अक्टूबर-नवंबर में बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ सकती है, लेकिन जल्दी कटाई से गन्ने की रिकवरी कम होने का खतरा रहता है। इससे पूरे सीजन का चीनी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
रिकवरी बढ़ाना ज्यादा जरूरी
2025-26 सीजन में उत्तर प्रदेश में गन्ने से चीनी की औसत रिकवरी 10.19 फीसदी रही। वहीं, प्रदेश की 20 बड़ी मिलों में यह औसत करीब 10.4 फीसदी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पेराई जल्दी शुरू करने के बजाय सरकार को कम रिकवरी वाली मिलों पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, रिकवरी बढ़ाकर भी चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है। करीब 24 मिलों में रिकवरी 9.5 फीसदी से कम है। वहीं, सबसे ज्यादा 11.64 फीसदी रिकवरी वाली मिल टॉप 20 उत्पादन वाली मिलों में शामिल नहीं है।
चीनी मिलों के सामने गुड़ का भी मुकाबला
अगले सीजन में चीनी मिलों के सामने एक और चुनौती स्थानीय गुड़ बनाने वाली इकाइयों यानी कोल्हू से मिल सकती है। इस साल उत्तर प्रदेश में गुड़ का खुदरा भाव 100 रुपये किलो से ऊपर पहुंच गया था और अब भी करीब 90 रुपये किलो के आसपास है। ऐसे में अक्टूबर में कोल्हू किसानों को गन्ने के लिए चीनी मिलों से ज्यादा दाम देने की कोशिश कर सकते हैं।
चीनी मिलों के लिए इसका मतलब यह है कि उन्हें गन्ने की सप्लाई के लिए गुड़ बनाने वाली इकाइयों से मुकाबला करना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि अगर गुड़ बनाने वाली इकाइयां बिना किसी सरकारी मदद के किसानों को तय SAP से ज्यादा दाम दे सकती हैं, तो चीनी मिलों को भी किसानों को बेहतर कीमत देने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।





