लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को राहत देने और आलू विकास से जुड़ी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंचाने के लिए नया पोर्टल लॉन्च किया है। प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने 17 अगस्त 2026 को लखनऊ के उद्यान भवन में इस पोर्टल का शुभारंभ किया। इस मौके पर आलू किसानों के लिए तीन अहम योजनाओं की भी शुरुआत की गई।
किसानों के लिए शुरू हुईं तीन योजनाएं
सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं में भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना, निजी शीतगृहों में रखे आलू के भंडारण प्रभार में छूट और आलू बीज की बिक्री दर में छूट शामिल हैं। इन योजनाओं का मकसद किसानों को आलू की खेती और भंडारण में राहत देना है।
आलू के भाव में ज्यादा उतार-चढ़ाव से मिलेगी राहत
सरकार ने आलू के दाम में होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए भामाशाह भाव स्थिरता कोष की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य बाजार में आलू के भाव में ज्यादा गिरावट आने पर किसानों को राहत देना और उन्हें बेहतर कीमत दिलाने में मदद करना है।
कोल्ड स्टोरेज में आलू रखना होगा सस्ता
निजी शीतगृहों में आलू रखने वाले किसानों को भी इस पहल से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने आलू के भंडारण प्रभार में छूट की योजना शुरू की है। इससे किसानों पर कोल्ड स्टोरेज का खर्च कम होगा और उन्हें अपनी फसल को जल्दबाजी में कम कीमत पर बेचने का दबाव कम हो सकता है।
आलू बीज पर भी मिलेगी छूट
सरकार ने आलू बीज की बिक्री दर में छूट की योजना भी शुरू की है। इसका फायदा किसानों को अगली फसल की तैयारी के दौरान मिल सकेगा। बीज की लागत कम होने से किसानों की कुल खेती लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
एक ही पोर्टल से योजनाओं की जानकारी और लाभ
नए पोर्टल के जरिए आलू विकास से जुड़ी योजनाओं को एक जगह लाने की कोशिश की गई है। इससे किसानों को योजनाओं की जानकारी लेने और उनसे जुड़े लाभ के लिए आवेदन करने में आसानी होगी। सरकार का उद्देश्य आलू क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाना है।
सरकार के मुताबिक, आलू विकास की इन योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने, लागत कम करने और प्रदेश में आलू उत्पादन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही आलू से जुड़ी खेती, भंडारण और बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।





