लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सरकारी कृषि मंडियों (मंडी) की आय वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 15% बढ़कर 2,305 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में मंडियों की आय 1,991 करोड़ रुपये थी। राज्य सरकार का कहना है कि अब मंडियों को और आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सके।
उत्तर प्रदेश में 75 जिलों में करीब 250 सरकारी अधिसूचित मंडियां संचालित हैं। राज्य में कृषि उपज की खरीद-बिक्री का बड़ा हिस्सा इन्हीं मंडियों के जरिए होता है। उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है और यहां हर साल 7 करोड़ टन (70 मिलियन टन) से अधिक खाद्यान्न का उत्पादन होता है।
मंडियों में बनेंगी कृषि प्रोसेसिंग यूनिट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश मंडी परिषद की 172वीं बोर्ड बैठक में मंडियों को आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया। सरकार ने फैसला किया है कि मंडियों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर कृषि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इससे किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलने और वैल्यू एडिशन का फायदा मिलने की उम्मीद है।
दलहन और तिलहन खरीद को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में यह भी तय किया गया कि मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद को मजबूत करने के लिए सहकारी संस्थाओं को ब्याज मुक्त कार्यशील पूंजी (Interest-free Working Capital) उपलब्ध कराई जाएगी।
e-NAM और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार मंडियों को e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी काम करेगी। इसके साथ ही किसानों को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से जोड़ा जाएगा और हर जिले में जैविक कृषि उत्पादों का प्रमाणन (ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन) कराने की व्यवस्था की जाएगी।
2026-27 के लिए बड़ा उत्पादन लक्ष्य
राज्य सरकार ने 2026-27 के खरीफ सीजन में 30.25 मिलियन टन खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। यह पिछले साल के 25.62 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में करीब 20% अधिक है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को कृषि निर्यात का बड़ा केंद्र बनाना है।





