फसल में हानिकारक कीटों का प्रकोप बढ़ने पर किसान अक्सर कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कीटों को मुख्य फसल से दूर रखने के लिए ट्रैप क्रॉप भी एक आसान और पर्यावरण के अनुकूल तरीका है। इसमें कुछ खास फसलों या पौधों को मुख्य फसल के बीच या उसके आसपास लगाया जाता है, ताकि कीट मुख्य फसल की बजाय इन पौधों की ओर आकर्षित हों।
ट्रैप क्रॉप कैसे काम करती है?
ट्रैप क्रॉप ऐसी फसल या पौधे होते हैं, जिन्हें इस तरह लगाया जाता है कि हानिकारक कीट मुख्य फसल की बजाय उनकी ओर आकर्षित हों। इससे मुख्य फसल को कीटों के हमले से बचाने में मदद मिलती है। आमतौर पर जब कीटों का प्रकोप बढ़ता है तो ट्रैप क्रॉप को हटाकर नष्ट किया जा सकता है, जिससे कीट मुख्य फसल तक नहीं पहुंच पाते।
टमाटर, बैंगन और गोभी में ऐसे करें इस्तेमाल
ICAR के मुताबिक टमाटर और बैंगन की फसल में गेंदा एक प्रभावी ट्रैप क्रॉप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, गोभी की फसल में सरसों को ट्रैप क्रॉप के तौर पर लगाया जाता है। सरसों डायमंड बैक मॉथ जैसे कीटों को अपनी ओर आकर्षित करती है, जिससे गोभी की फसल को बचाने में मदद मिलती है।
कीटनाशकों पर निर्भरता भी हो सकती है कम
ट्रैप क्रॉप का इस्तेमाल समेकित कीट प्रबंधन (IPM) में किया जा सकता है। यह कीटों को नियंत्रित करने का आसान, प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल तरीका है। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है और जैव विविधता, मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में भी फायदा होता है।
ट्रैप क्रॉप के साथ दूसरे ट्रैप भी उपयोगी
कीट प्रबंधन में स्टिकी ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप जैसे दूसरे तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इनका काम करने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन सही संख्या और समय पर इनका इस्तेमाल करने से कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिलती है। इससे किसानों की लागत कम करने और फसल की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिल सकती है।





