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भाव के उतार-चढ़ाव से परेशान पाम किसान, तेलंगाना ने मांगा ₹25 हजार प्रति टन का गारंटीड रेट

पाम ऑयल की खेती दूसरी कई फसलों से अलग है। इसमें पौध लगाने के बाद उत्पादन शुरू होने में कई साल लगते हैं। इस दौरान किसानों को लगातार पौधों की देखभाल और खेती पर खर्च करना पड़ता है, लेकिन उन्हें तुरंत आमदनी नहीं मिलती।

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News Potli·News Potli Desk·21 Aug 2026

Palm Oil farming

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देश में पाम ऑयल की खेती का रकबा बढ़ रहा है, लेकिन किसानों के सामने उपज का सही और स्थिर भाव मिलना बड़ी चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बदलाव का असर सीधे किसानों की आमदनी पर पड़ता है। ऐसे में तेलंगाना सरकार ने केंद्र से Fresh Fruit Bunch (FFB) यानी ताजे पाम फलों के गुच्छों का गारंटीड रेट ₹25,000 प्रति टन तय करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और उनकी आमदनी सुरक्षित होगी।

केंद्र के सामने रखी मांग

तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने पाम किसानों के लिए FFB का सुनिश्चित भाव ₹25,000 प्रति टन तय करने की मांग की।

मंत्री ने यह भी कहा कि पाम के उत्पादन की लागत बढ़ने के साथ किसानों को मिलने वाले भाव में भी समय-समय पर संशोधन किया जाना चाहिए। इससे बढ़ती लागत के बीच किसानों की कमाई पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित होते हैं भाव

पाम ऑयल की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करती हैं। वैश्विक कीमतों में बदलाव होने पर घरेलू स्तर पर भी FFB के दाम प्रभावित होते हैं। ऐसे में किसानों को कभी बेहतर भाव मिलता है तो कभी कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ता है।

तेलंगाना सरकार का मानना है कि ₹25 हजार प्रति टन का गारंटीड रेट किसानों को इस तरह के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा दे सकता है और उन्हें खेती से एक निश्चित आय मिलने में मदद करेगा।

पाम की खेती में कई साल बाद शुरू होती है कमाई

पाम ऑयल की खेती दूसरी कई फसलों से अलग है। इसमें पौध लगाने के बाद उत्पादन शुरू होने में कई साल लगते हैं। इस दौरान किसानों को लगातार पौधों की देखभाल और खेती पर खर्च करना पड़ता है, लेकिन उन्हें तुरंत आमदनी नहीं मिलती।

मंत्री ने कहा कि पाम की खेती में शुरुआती निवेश काफी ज्यादा होता है और किसानों को आय के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उपज का अच्छा भाव मिलना जरूरी है, ताकि किसान शुरुआती निवेश की भरपाई कर सकें और खेती को लंबे समय तक जारी रख सकें।

आंध्र प्रदेश से भी सहयोग की अपील

तेलंगाना सरकार ने इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से भी सहयोग करने की अपील की है। दोनों राज्यों में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि किसानों के हित में केंद्र के स्तर पर बेहतर मूल्य व्यवस्था बनाना जरूरी है।

किसानों को क्या फायदा होगा?

अगर FFB के लिए ₹25,000 प्रति टन का सुनिश्चित भाव तय होता है, तो किसानों को बाजार में होने वाली अचानक कीमत गिरावट से कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है। साथ ही, उत्पादन लागत बढ़ने के अनुसार कीमत में संशोधन की व्यवस्था होने पर किसानों की आय और निवेश दोनों को सुरक्षा मिल सकती है।

तेलंगाना सरकार का कहना है कि पाम ऑयल की खेती में किसानों का निवेश और इंतजार दोनों लंबा है। ऐसे में स्थिर और लाभकारी भाव मिलने से किसानों का भरोसा बढ़ेगा और देश में पाम ऑयल की खेती को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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