रबी सीजन की तैयारी कर रहे तेलंगाना के किसानों से राज्य सरकार ने इस बार धान की खेती न करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि राज्य के जलाशयों में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। ऐसे में धान की खेती करने से सिंचाई के लिए पानी की कमी हो सकती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार ने किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली दलहन फसलों की खेती करने की सलाह दी है।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भी किसानों से गर्मी के मौसम में धान की बुवाई से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अल नीनो के असर के कारण आने वाले 9 से 10 महीनों तक राज्य में पानी की कमी बनी रह सकती है। ऐसे में सरकार के सामने लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने की चुनौती भी है।
जलाशयों में पानी की कमी
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कृष्णा नदी बेसिन में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इस बार 72 फीसदी कम पानी है। आमतौर पर इस समय राज्य के सभी जलाशयों में करीब 462 टीएमसी पानी होता है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 200 टीएमसी रह गया है।
सरकार का कहना है कि अगर पानी की कमी के बीच किसान धान की बुवाई करते हैं, तो फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा। इससे किसानों को नुकसान हो सकता है और पीने के पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की?
बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किसान संगठनों ने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए हैं। तेलंगाना रायतु संघम के सचिव टी. सागर का कहना है कि अगर सरकार ने कालेश्वरम और पलामुरु-रंगारेड्डी सिंचाई परियोजनाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया होता, तो राज्य के कई इलाकों में पानी की स्थिति बेहतर हो सकती थी।
किसानों का यह भी कहना है कि बाजार में चावल की मांग काफी ज्यादा है। उत्तर भारत के खुदरा बाजारों में चावल की कीमत करीब 80 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है। ऐसे में अगर किसान धान की खेती कम करते हैं, तो आने वाले महीनों में चावल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
धान की जगह दलहन उगाने की सलाह
राज्य के कृषि मंत्री टी. नागेश्वर राव ने किसानों को धान की जगह दलहन फसलें उगाने की सलाह दी है। दलहन फसलों में आमतौर पर धान के मुकाबले कम पानी की जरूरत होती है। सरकार का मानना है कि इससे पानी की कमी के बीच खेती करना आसान हो सकता है।
वहीं, विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने खरीफ फसल के अहम समय पर किसानों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण बिजली नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए सरकार की आलोचना की है।
बिजली की मांग भी बढ़ी
राज्य में पानी के साथ बिजली की मांग भी बढ़ रही है। सरकार के मुताबिक, अक्टूबर में बिजली की मांग बढ़कर 20,000 मेगावाट हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह करीब 15,000 मेगावाट थी।
ऐसे में तेलंगाना सरकार के सामने किसानों की सिंचाई की जरूरत, जलाशयों में पानी की कमी और लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। सरकार चाहती है कि किसान ऐसी फसलें चुनें, जिनमें कम पानी लगे और पानी की कमी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।





