देश में लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी है। सरकार ने यह फैसला घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को स्थिर करने के लिए लिया है। आयात की अनुमति 30 अक्टूबर 2026 तक दी गई है।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, चीनी का आयात Tariff Rate Quota (TRQ) व्यवस्था के तहत किया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत पहले से आयात की गई कच्ची चीनी को TRQ में बदलने का एक बार का विकल्प भी दिया है। इससे तैयार होने वाली रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक सिर्फ घरेलू बाजार में बेचने की शर्त रखी गई है।
आयात क्यों ?
दरअसल, देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। दिल्ली के खुदरा बाजार में चीनी का भाव बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतें करीब 18 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं।
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखते हुए भारत में सफेद चीनी की लैंडेड लागत करीब ₹58 प्रति किलो पड़ सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के मुताबिक, करीब 3 लाख टन चीनी भारत के लिए रवाना हो चुकी है, जबकि अगले कुछ दिनों में करीब 1 लाख टन और चीनी आने की उम्मीद है।
सप्लाई बढ़ाने के लिए क्या कर रही है सरकार
चीनी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर के बाद घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई कुछ कमजोर हो सकती थी। ऐसे में कम से कम 10 लाख टन चीनी का आयात जरूरी था। सरकार के इस फैसले से बाजार में उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
चीनी की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने सिर्फ आयात की मंजूरी ही नहीं दी है, बल्कि बड़े खरीदारों के स्टॉक पर भी सीमा लगाई है।
इसके अलावा सरकार ने चीनी मिलों को 2026-27 सीजन में अक्टूबर से ही गन्ने की पेराई शुरू करने और अक्टूबर-नवंबर में तैयार चीनी बेचने की अनुमति दी है। सरकार का मानना है कि इससे सीजन की शुरुआत में ही बाजार में नई चीनी आ जाएगी और सप्लाई की कमी नहीं होगी। इससे आयात की जरूरत भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
चीनी का स्टॉक घटने से बढ़ी चिंता
मौजूदा चीनी सीजन के अंत यानी सितंबर 2026 तक देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में यह करीब 49 लाख टन था।
इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 280 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 290 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच घरेलू बाजार के लिए करीब 245.5 लाख टन चीनी आवंटित की है।
गन्ने का रकबा थोड़ा घटा
2026-27 सीजन में किसानों ने करीब 58.31 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की है, जबकि पिछले साल यह रकबा 58.62 लाख हेक्टेयर था। यानी गन्ने का क्षेत्रफल थोड़ा कम हुआ है।
हालांकि, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) समेत कुछ वैश्विक एजेंसियों का अनुमान है कि 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन बढ़कर करीब 330 लाख टन हो सकता है। इसमें एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल को भी शामिल किया गया है।
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