भारत दुनिया में चीनी की खपत के मामले में सबसे आगे है। त्योहारों और रोजमर्रा की जरूरतों में चीनी की बड़ी मांग होने के कारण इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसी को देखते हुए सरकार ने फिलहाल तीन महीने के लिए बड़े खरीदारों पर सख्त स्टॉक लिमिट लागू की है।
सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। यानी जो कारोबारी या संस्थान हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी खरीदते या इस्तेमाल करते हैं, वे अब अपनी जरूरत के 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और जमाखोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
1 सितंबर से लागू होगा नया नियम
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 19 अगस्त 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसे “Sugar (Stockholding Limit of Bulk Consumers) Order, 2026” नाम दिया गया है। यह नया नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
इससे पहले बड़े खरीदारों को अधिकतम 30 दिन का स्टॉक रखने की अनुमति थी। अब यह सीमा घटाकर सिर्फ 15 दिन कर दी गई है।
किन खरीदारों पर लागू होगा नियम?
यह नियम उन Bulk Consumers पर लागू होगा, जिनकी औसत मासिक चीनी खपत कम से कम 10 मीट्रिक टन है। इनमें मिठाई और टॉफी बनाने वाली कंपनियां, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, फूड प्रोसेसिंग कंपनियां, मिठाई विक्रेता और दूसरे बड़े संस्थागत खरीदार शामिल हैं।
चाहे ये खरीदार चीनी सीधे चीनी मिलों से लें या डीलरों के जरिए खरीदें, उनकी खरीद की मात्रा का हिसाब रखा जाएगा।
GST रिटर्न से जांची जाएगी खपत
सरकार बड़े खरीदारों की वास्तविक चीनी खपत की जांच GST रिटर्न में दर्ज HSN Code के आधार पर करेगी। इसके अलावा चीनी मिलों द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को बेची गई चीनी की मासिक मात्रा का भी सत्यापन किया जाएगा। इसमें सीधे की गई बिक्री के साथ-साथ डीलर के जरिए हुई बिक्री भी शामिल होगी।
सरकारी संस्थानों को छूट
सरकार ने इस नियम से केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्थानीय निकायों से जुड़ी संस्थाओं को छूट दी है। इन संस्थानों पर 15 दिन की स्टॉक सीमा लागू नहीं होगी।
त्योहारों के बीच क्यों लिया गया फैसला?
चीनी की मांग आमतौर पर अगस्त से नवंबर के बीच बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आते हैं। मिठाई, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां भी इस समय ज्यादा चीनी खरीदती हैं।
दूसरी ओर, कई इलाकों में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात का असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। इससे चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में बढ़ती मांग और सीमित सप्लाई के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
एक महीने में करीब 10 फीसदी बढ़े दाम
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पिछले करीब एक महीने में चीनी के दाम लगभग 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि बड़े खरीदारों की स्टॉक लिमिट घटाने से बाजार में ज्यादा चीनी उपलब्ध होगी और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।





