राजस्थान के सीकर जिले की किसान संतोष देवी खेदड़ ने खेती में अपने काम से नई पहचान बनाई है। कम पानी और रेतीली जमीन वाले इलाके में उन्होंने अनार समेत कई फलदार फसलों की खेती की है। अब उनके इसी अनुभव का फायदा दूसरे किसानों को भी मिलेगा। राजस्थान कृषि विभाग ने उन्हें ‘किसान ब्रांड एम्बेसडर एवं ट्रेनर’ नियुक्त किया है। इस जिम्मेदारी के तहत वह प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में किसानों को जैविक, पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के तरीके सिखाएंगी।
रेतीली जमीन पर उगा रहीं कई तरह के फल
सीकर जिले के बेरी गांव की रहने वाली संतोष देवी ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी को अपनाया। वह अपने खेत में ड्रिप सिंचाई और जैविक खेती के तरीकों का इस्तेमाल करती हैं। उनके फार्म पर अनार के साथ गर्म जलवायु में उगने वाली सेब की किस्म हरमन-99, मौसमी, अमरूद, नींबू और चीकू की भी खेती की जा रही है।
उनका खेत दिखाता है कि कम पानी वाले इलाकों में भी सही फसल चुनकर और पानी का बेहतर इस्तेमाल करके बागवानी की जा सकती है।
हर साल तैयार करती हैं एक लाख से ज्यादा पौधे
संतोष देवी ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) से पंजीकृत नर्सरी भी बनाई है। यहां हर साल एक लाख से ज्यादा पौधे तैयार किए जाते हैं। इस नर्सरी के जरिए किसानों को फलदार पौधे उपलब्ध कराने और बागवानी को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा उनके काम का नाम
संतोष देवी के काम को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उन्हें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किए गए चुनिंदा किसानों में शामिल होने का मौका मिला। इसके अलावा, 2024 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने उन्हें ‘इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। अनार की खेती में उनके काम के कारण उन्हें ‘अनार किंग’ के नाम से भी जाना जाता है।
दूसरे राज्यों के किसान भी आते हैं सीखने
संतोष देवी का फार्म केवल खेती और उत्पादन तक सीमित नहीं है। यहां किसान और कृषि विद्यार्थी आधुनिक खेती के तरीके सीखने आते हैं। राजस्थान के अलावा हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत दूसरे राज्यों के किसान भी उनके फार्म पर पहुंचते हैं। यहां उन्हें बागवानी, ड्रिप सिंचाई और खेती के नए तरीकों को समझने का मौका मिलता है।
किसानों को प्रशिक्षण देने की मिली जिम्मेदारी
राजस्थान के कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल की ओर से जारी नियुक्ति के अनुसार, संतोष देवी प्रदेश में आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में हिस्सा लेंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए वह जैविक, पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को जानकारी देंगी।
हर महीने मिलेगा 11 हजार रुपये मानदेय
प्रशिक्षण और कार्यशालाओं में हिस्सा लेने के दौरान कृषि विभाग की ओर से उन्हें यात्रा, भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के चेयरमैन ताराचंद गोयल की ओर से उन्हें 11,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। यह मानदेय अगले आदेश तक देय होगा।
संतोष देवी अब अपने खेत में किए गए प्रयोगों और अनुभवों को दूसरे किसानों तक पहुंचाएंगी। खासकर राजस्थान जैसे कम बारिश वाले इलाकों में पानी बचाने, ड्रिप सिंचाई, बागवानी और फसल विविधीकरण के उनके अनुभव किसानों के काम आ सकते हैं।
खेती में उनकी सफलता की कहानी NewsPotli ने भी दिखाई है…





