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दाल-तिलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए नए विकल्प खोजें, सिर्फ रिसर्च पेपर नहीं किसानों के काम का शोध करें: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के वैज्ञानिकों से दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए जीएम बीजों के अलावा अन्य विकल्पों पर काम करने को कहा है।

Pooja Rai

Pooja Rai·17 Jul 2026

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर वैज्ञानिकों से दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए तेजी से काम करने की अपील की।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर वैज्ञानिकों से दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए तेजी से काम करने की अपील की।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर वैज्ञानिकों से दाल और तिलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए तेजी से काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर दूसरे देश बिना जीएम (GM) बीजों के भी दालों की अच्छी पैदावार ले सकते हैं, तो भारत भी ऐसा कर सकता है। वैज्ञानिकों को जीएम बीजों के अलावा दूसरे प्रभावी विकल्प तलाशने चाहिए।

चौहान ने कहा कि भारत आज भी हर साल करीब 60-70 लाख टन दाल और 1.5 से 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है। उन्होंने बताया कि सिंचाई की सुविधा बढ़ने के बाद कई किसान धान और गेहूं की खेती की ओर चले जाते हैं, जिससे दालों का रकबा कम हो जाता है और आयात पर निर्भरता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि एक एकड़ धान से 30-35 क्विंटल उत्पादन मिलता है, जबकि चना और मूंग जैसी दालों में केवल करीब 5 क्विंटल उत्पादन होता है। वहीं, एक एकड़ मक्का से 100 क्विंटल से अधिक उत्पादन मिल सकता है। उन्होंने इस अंतर को कम करना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बताया।

कृषि मंत्री ने उर्वरकों में आत्मनिर्भर बनने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को कब तक आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा, इस पर गंभीरता से काम करना होगा।

'सिर्फ रिसर्च पेपर नहीं, किसानों की समस्याओं का समाधान चाहिए'

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसा शोध किसी काम का नहीं है, जिससे सिर्फ रिसर्च पेपर प्रकाशित हों। वैज्ञानिकों का शोध किसानों, मिट्टी और खेती की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाला होना चाहिए। उन्होंने ICAR की 52 शोध टीमों से तेजी से परिणाम देने की अपील की। साथ ही गन्ने की '238' किस्म की गुणवत्ता, बीटी कपास में गुलाबी सुंडी की समस्या और लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी शोध तेज करने को कहा।

ICAR के लिए नए लक्ष्य

कृषि मंत्री ने ICAR के 100वें स्थापना वर्ष तक 100 क्लाइमेट-स्मार्ट गांव विकसित करने, AI, रोबोटिक्स, जीन एडिटिंग और जलवायु-अनुकूल खेती जैसे क्षेत्रों में 100 युवा वैज्ञानिकों को काम पर लगाने तथा किसानों तक मोबाइल के जरिए वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के लिए ICAR ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य होना चाहिए कि ICAR के 100 वर्ष पूरे होने तक 10 करोड़ किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक और सलाह सीधे पहुंचे। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को प्रशिक्षण केंद्र के बजाय इनोवेशन और तकनीकी सहायता केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

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