देश के अलग-अलग हिस्सों में खेती की परिस्थितियां अलग हैं। कहीं बारिश की कमी है तो कहीं पानी और मिट्टी की समस्या, वहीं कुछ राज्यों में बागवानी और दूसरी फसलों की अच्छी संभावनाएं हैं। ऐसे में पूरे देश के लिए एक जैसी कृषि योजना बनाने के बजाय क्षेत्र के हिसाब से खेती की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी को लेकर हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों की Regional Agriculture Conference आयोजित हुई। इसमें किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, रबी सीजन की तैयारी और बागवानी को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
खेती के बिना दुनिया नहीं चल सकती
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन खेती की जरूरत कभी खत्म नहीं होगी। मशीन ब्रेड बना सकती है, लेकिन गेहूं पैदा नहीं कर सकती। फल, सब्जियां और अनाज खेत से ही आएंगे और इन्हें किसान ही उगाएंगे।
उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि जीवनदाता भी हैं। सरकार की कृषि नीति के तीन बड़े लक्ष्य हैं, देश की खाद्य सुरक्षा बनाए रखना, किसानों की आजीविका को सुरक्षित करना और लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाना।
हर राज्य के लिए अलग कृषि योजना की जरूरत
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के हर राज्य की खेती की परिस्थितियां अलग हैं। मिट्टी, पानी, मौसम और फसलों में काफी अंतर है। इसलिए पूरे देश के लिए एक ही रबी या खरीफ योजना बनाना सही नहीं होगा।
इसी वजह से Regional Agriculture Conference के जरिए राज्यों की अलग-अलग समस्याओं और जरूरतों पर चर्चा की जा रही है। केंद्र और राज्य मिलकर खेती के लिए ऐसा रोडमैप तैयार करेंगे, जो स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से काम करे।
पुराने नियम बदलने के लिए राज्यों से सुझाव
कृषि मंत्री ने राज्यों से ऐसे पुराने कानूनों और नियमों की पहचान करने को कहा, जिनकी वजह से किसानों या आम लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी नियम में बदलाव की जरूरत है तो राज्य सरकारें केंद्र को अपने सुझाव भेजें। केंद्र अपने स्तर पर जरूरी बदलाव करेगा और राज्यों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में बदलाव करने चाहिए।
नारियल और काजू किसानों पर भी फोकस
दक्षिण भारत में नारियल, काजू, कोको, कॉफी और मसालों जैसी फसलों की बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि मंत्री ने इन क्षेत्रों में किसानों को ज्यादा फायदा दिलाने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि भारत का नारियल निर्यात एक साल में 4,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,038 करोड़ रुपये हो गया है। यानी इसमें करीब 62 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने पुराने नारियल बागानों को भी धीरे-धीरे बदलने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि 60-70 साल पुराने पेड़ों में उत्पादन और गुणवत्ता कम हो सकती है। इसलिए पुराने पेड़ों की जगह चरणबद्ध तरीके से नए पौधे लगाने की योजना बनाई जा सकती है।
दुनिया के बाजार में भारतीय किसानों के लिए मौका
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। इससे फल, सब्जियों और अनाज समेत कई कृषि उत्पादों के लिए विदेशी बाजार खुल रहे हैं।
उन्होंने राज्यों से कहा कि वे देखें कि विदेशों में किन कृषि उत्पादों की मांग ज्यादा है और उसी हिसाब से किसानों को उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही खेती से लेकर पैकिंग और सप्लाई तक अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर ध्यान देने की जरूरत है।
तेलंगाना में 2 लाख घरों का काम शुरू होगा
कृषि सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि तेलंगाना में PMAY-G के तहत 2 लाख घरों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की पहली किस्त राज्य को दी जा चुकी है। अब इन घरों का निर्माण शुरू होगा। सर्वे में चिन्हित बाकी कच्चे घरों को भी आगे की किस्तों में योजना के तहत शामिल किया जाएगा।
सम्मेलन में दक्षिण भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ कृषि विशेषज्ञों, ICAR संस्थानों, किसानों और दूसरे हितधारकों ने हिस्सा लिया। इसका मकसद क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से खेती की योजना बनाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।





