नई दिल्ली। देश की खेती और गांवों को मजबूत बनाने के लिए सरकार अब उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार दिलाने, फूड प्रोसेसिंग बढ़ाने और कृषि उत्पादों को विदेशों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘शक्ति की सप्तधारा’ के विजन को जमीन पर उतारने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, किसान, वैज्ञानिक, एफपीओ, फूड प्रोसेसर और निर्यातकों को मिलकर काम करना होगा।
पुसा स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, किसानों, वैज्ञानिकों, लखपति दीदियों, फूड प्रोसेसर और निर्यातकों को देश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दिलाया।
खेत से सीधे दुनिया के बाजार तक पहुंचे किसानों का माल
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब सिर्फ ज्यादा उत्पादन करना ही काफी नहीं है। किसानों के उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी हो, वह सुरक्षित हो और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरे, यह भी जरूरी है। इससे भारतीय कृषि उत्पादों को विदेशों में बड़ा बाजार मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में मिर्च, मसाले, फल, फूल, पारंपरिक खाद्य पदार्थ और कई दूसरे कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में पैदा होते हैं। अगर इनकी सही तरीके से प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जाए तो किसानों की कमाई बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि किसान, फूड प्रोसेसर और निर्यातक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन सभी को एक साथ काम करने की जरूरत है। प्राकृतिक, जैविक और रसायन मुक्त खेती से तैयार उत्पादों की मांग भारत के साथ-साथ दुनिया में भी बढ़ रही है।
हर राज्य और जिले के लिए अलग कृषि योजना की जरूरत
कृषि मंत्री ने कहा कि देश के हर हिस्से की खेती एक जैसी नहीं है। कहीं पानी ज्यादा है तो कहीं कम, कहीं अलग तरह की मिट्टी है तो कहीं अलग मौसम। इसलिए हर राज्य और जिले के हिसाब से अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसानों को यह जानकारी भी दी जानी चाहिए कि देश और विदेश के बाजार में किस फसल की कितनी मांग है। इसके आधार पर किसानों को सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
इस काम में आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य सरकारों और कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका होगी। नई तकनीक, बेहतर बीज, मशीनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।
खेती की लागत घटे और किसान को सही दाम मिले
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता साफ है- उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, गुणवत्ता सुधारना और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाना।
किसानों को मौसम, बाजार और फसल से जुड़ी सही जानकारी समय पर मिले, इस पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, सिंचाई, पानी बचाने, फसल विविधीकरण और खेती के साथ दूसरे आय के साधन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय किसान एकीकृत खेती जैसे मॉडल अपनाएं, जिसमें फसल के साथ पशुपालन, बागवानी या दूसरे कृषि आधारित काम भी किए जा सकें। इससे किसान की कुल आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
3 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य पूरा, अब 6 करोड़ का लक्ष्य
ग्रामीण महिलाओं की कमाई बढ़ाने को लेकर भी सरकार ने बड़ा लक्ष्य रखा है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पूरा हो चुका है। अब सरकार ने देश में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, आर्थिक मदद, बाजार और अपना काम शुरू करने के अवसर दिए जा रहे हैं। गांव की महिलाओं के बनाए खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प, आयुर्वेदिक और पारंपरिक उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की कमाई बढ़ने से सिर्फ उनका परिवार ही मजबूत नहीं होता, बल्कि पूरा गांव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
गांवों का विकास हुए बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं होगा
कृषि मंत्री ने कहा कि अगर देश को विकसित बनाना है तो गांवों का विकास भी उतना ही जरूरी है। गांवों में पक्के घर, सड़क, पानी, रोजगार, खेती और आजीविका से जुड़ी योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सिर्फ दफ्तर में बैठकर योजनाओं की समीक्षा न करें, बल्कि गांवों में जाकर देखें कि योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। पानी बचाने, नदियों के पुनर्जीवन, जमीन के संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से जुड़े कामों में तेजी लाने की जरूरत है।
अधिकारियों को दिए सफलता के चार मंत्र
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और कर्मचारियों को काम करने के चार मंत्र भी बताए- “पांव में चक्कर, मुंह में शक्कर, सीने में आग और माथे पर बर्फ।”
उन्होंने समझाया कि ‘पांव में चक्कर’ का मतलब है कि अधिकारी लगातार फील्ड में जाएं और काम की स्थिति देखें। ‘मुंह में शक्कर’ का मतलब है कि लोगों और सहकर्मियों से अच्छे व्यवहार के साथ काम करें। ‘सीने में आग’ का मतलब अपने लक्ष्य को पूरा करने का जुनून और ‘माथे पर बर्फ’ का मतलब मुश्किल समय में धैर्य और शांत दिमाग रखना है।
किसान, वैज्ञानिक और कंपनियां मिलकर करें काम
कृषि मंत्री ने कहा कि खेती को मजबूत बनाने के लिए किसान, वैज्ञानिक, एफपीओ, फूड प्रोसेसर और निर्यातक सभी को साथ आना होगा। वैज्ञानिकों को किसानों की असली जरूरत के हिसाब से तकनीक और समाधान तैयार करने होंगे।
उन्होंने कहा कि खेत से बाजार तक पूरी सप्लाई चेन मजबूत होगी तो किसानों को बेहतर दाम मिलेगा और ग्राहकों को भी अच्छी गुणवत्ता का सामान मिलेगा।
किसानों और लखपति दीदियों ने भी साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में किसानों, लखपति दीदियों, एफपीओ और निर्यातकों ने अपने अनुभव भी साझा किए। ललिता ने लखपति दीदी योजना और ग्रामीण महिलाओं की सफलता के बारे में बताया। किसान विनोद कुमार सैनी ने खेती में उत्पादन, तकनीक और बाजार से जुड़ी बातें रखीं। वहीं मुकेश जैन ने कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जुड़े सुझाव दिए। एफपीओ और किसानों को बाजार से जोड़ने पर प्रफुल्ल गोस्वामी ने अपने विचार रखे।
सरकार ने आगे की प्राथमिकताएं भी बताईं
कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विभाग के सचिवों ने भी अपने-अपने विभाग की योजनाओं और आगे की प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी दी।





