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महाराष्ट्र में किसानों के मुद्दों पर बोले राकेश टिकैत, 10 अगस्त तक बड़े आंदोलन का दिया संकेत

जलगांव में राकेश टिकैत ने महाराष्ट्र के किसानों की कर्ज, MSP और फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने व्यापक कर्जमाफी और MSP की कानूनी गारंटी की मांग करते हुए छोटे किसान संगठनों को एकजुट कर 10 अगस्त तक बड़े आंदोलन का संकेत दिया।

Pooja Rai

Pooja Rai·08 Aug 2026

जलगांव में राकेश टिकैत ने महाराष्ट्र के किसानों की कर्ज, MSP और फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

जलगांव में राकेश टिकैत ने महाराष्ट्र के किसानों की कर्ज, MSP और फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

जलगांव (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र में किसानों की कर्ज, फसल के दाम और बीमा से जुड़ी समस्याओं को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार पर निशाना साधा। जलगांव पहुंचे टिकैत ने कहा कि राज्य के कई किसान आर्थिक दबाव में हैं और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर किसानों की मांगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो 10 अगस्त तक छोटे-छोटे किसान संगठनों को एकजुट कर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।

कर्ज के बोझ से परेशान किसान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टिकैत ने कहा कि महाराष्ट्र में किसान कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं और कई किसानों की जमीन तक गिरवी है। उन्होंने किसान आत्महत्या की घटनाओं को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उनका कहना है कि केवल 50 हजार रुपये तक की कर्जमाफी से किसानों को पूरी राहत नहीं मिल रही है। किसानों के लिए एकमुश्त और व्यापक कर्जमाफी की जरूरत है, ताकि वे आर्थिक दबाव से बाहर निकल सकें।

कपास किसानों को सही दाम नहीं मिलने का मुद्दा

महाराष्ट्र के कपास किसानों की समस्या भी टिकैत के निशाने पर रही। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में किसान कपास की खेती करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील का असर कपास समेत दूसरी फसलों के किसानों पर पड़ सकता है।

‘MSP की गारंटी मिले तो बार-बार कर्जमाफी की जरूरत नहीं’

टिकैत ने कहा कि किसानों की समस्या का स्थायी समाधान सिर्फ कर्जमाफी नहीं है। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी और सुनिश्चित दाम मिलना ज्यादा जरूरी है।

उन्होंने दावा किया कि बिहार में किसानों को MSP से कम कीमत पर फसल बेचने की वजह से करीब एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, महाराष्ट्र में यह नुकसान करीब दो लाख करोड़ रुपये तक होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर किसानों को MSP की कानूनी गारंटी मिल जाए और फसल का उचित दाम मिलने लगे तो किसान अपनी कमाई से कर्ज चुकाने में सक्षम हो सकते हैं।

फसल बीमा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

किसान नेता ने फसल बीमा योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के कई किसानों को बीमा का लाभ लेने में दिक्कत आ रही है। उनका आरोप है कि कई जगह बीमा कंपनियों के स्थानीय कार्यालय तक नहीं हैं, जिससे किसानों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए परेशानी होती है।टिकैत ने सरकार और बीमा कंपनियों के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगाए।

छोटे किसान संगठनों को एकजुट करने की अपील

टिकैत ने कहा कि महाराष्ट्र में कई छोटे किसान संगठन काम कर रहे हैं, लेकिन किसानों के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए इन संगठनों का एक मंच पर आना जरूरी है।

उन्होंने कर्जमाफी, MSP की कानूनी गारंटी, फसल के उचित दाम और बेहतर फसल बीमा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर किसानों को एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए और विपक्ष को भी संसद में किसानों के मुद्दे मजबूती से उठाने चाहिए। टिकैत ने संकेत दिया कि अगर किसानों की समस्याओं पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त तक आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी की जा सकती है।

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