राजस्थान देश में सरसों की खेती और उत्पादन के मामले में सबसे आगे है। 2023-24 में देश के कुल रैपसीड-सरसों उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब 45.4 फीसदी रही। ऐसे में राज्य में सरसों की खेती को और बेहतर बनाने और किसानों को टिकाऊ खेती के तरीकों से जोड़ने के लिए अब पांच साल का एक नया कार्यक्रम शुरू किया गया है।
‘सरसों संकल्प’ नाम से शुरू किए गए इस कार्यक्रम को Solvent Extractors’ Association of India (SEA), AWL Agri Business Ltd, Solidaridad Network Asia Ltd और Bharatkhand Foundation मिलकर चला रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थान के बूंदी, टोंक और झालावाड़ जिलों से होगी।
पहले साल 15 हजार किसानों को जोड़ा जाएगा
‘सरसों संकल्प’ के तहत 2026-27 में करीब 15,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद कार्यक्रम का दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा और 2030-31 तक 40,000 किसानों तक पहुंचने की योजना है। पांच साल के इस कार्यक्रम के लिए कुल 16 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
ट्रेनिंग और सलाह मिलेगी
इस कार्यक्रम के तहत किसानों को सरसों की खेती के बेहतर तरीकों की ट्रेनिंग और खेतों में तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा मॉडल फार्म तैयार किए जाएंगे, जहां किसान खेती के नए तरीकों को देखकर और समझकर उन्हें अपने खेत में अपना सकेंगे।
किसानों को उनकी जमीन और फसल के हिसाब से मिट्टी और फसल संबंधी सलाह भी दी जाएगी। इसके साथ ही खेत स्तर पर किसानों को तकनीकी जानकारी देने, खेती का रिकॉर्ड रखने और फसल की प्रगति पर नजर रखने का काम भी किया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती के बेहतर तरीके अपनाने और सरसों का उत्पादन टिकाऊ तरीके से बढ़ाने में मदद करना है।





