खरीफ सीजन में कम बारिश से परेशान किसानों के सामने अब रबी फसलों को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी घट रही है, वहीं सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी चुनौती बन रही है। इसका असर गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई और पैदावार पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की उम्मीद अब सर्दियों में होने वाली बारिश पर टिकी है। अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो फसलों की बुवाई का रकबा घटने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
रबी की फसलों की बुवाई आमतौर पर सर्दियों में होती है। इनकी अच्छी बढ़वार के लिए खेतों में नमी, सिंचाई और सर्दियों में होने वाली बारिश की अहम भूमिका होती है। खासकर उत्तर भारत में गेहूं की शुरुआती बढ़वार के दौरान बारिश खेतों में नमी बनाए रखने में मदद करती है। वहीं, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलें कई इलाकों में बारिश पर निर्भर रहती हैं। अगर समय पर पानी नहीं मिला, तो किसान इन फसलों की बुवाई कम कर सकते हैं। जिन खेतों में बुवाई हो चुकी है, वहां भी नमी की कमी से फसल की बढ़वार और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
कई राज्यों में बारिश की भारी कमी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में सितंबर के दौरान सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश हुई। वहीं, 1 से 18 अक्टूबर के बीच राज्य में सामान्य से 55 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
महाराष्ट्र में स्थिति और भी चिंताजनक है। राज्य की 358 में से 305 तहसीलों यानी करीब 85 फीसदी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। सितंबर में महाराष्ट्र में सामान्य से 52 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि 1 से 18 अक्टूबर के बीच सामान्य बारिश का सिर्फ 3 फीसदी ही दर्ज किया गया।
मध्य प्रदेश में सितंबर के दौरान सामान्य से 19 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी, लेकिन अक्टूबर में 18 तारीख तक सामान्य से 96 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में भी अक्टूबर के दौरान सामान्य से 37 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि, सितंबर में सामान्य से 65 फीसदी ज्यादा बारिश होने के कारण राज्य के कई इलाकों में खेतों में बुवाई के लिए कुछ नमी बनी हुई है।
दूसरी ओर, पंजाब और हरियाणा में अक्टूबर की बारिश से कुछ राहत मिली है। पंजाब में सितंबर के दौरान सामान्य से 64 फीसदी कम बारिश हुई थी, लेकिन 1 से 18 अक्टूबर के बीच सामान्य से 256 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। हरियाणा में सितंबर में सामान्य से 44 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि अक्टूबर की इसी अवधि में सामान्य से 191 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। इससे इन राज्यों में गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में मदद मिल सकती है। यहां गेहूं की बुवाई आमतौर पर नवंबर के पहले सप्ताह के आसपास शुरू होती है।
रबी की बुवाई पर क्यों बढ़ी चिंता?
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान देश के प्रमुख रबी उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। यहां गेहूं, सरसों, चना और मसूर जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। ऐसे में इन राज्यों में बारिश की कमी का असर देश के कुल खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
कृषि मंत्रालय ने अभी रबी की बुवाई के साप्ताहिक आंकड़े जारी करना शुरू नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक राजस्थान में चने की बुवाई का रकबा 6,000 हेक्टेयर से कम था, जबकि सरसों की बुवाई करीब एक लाख हेक्टेयर में हुई थी।
ये आंकड़े राजस्थान के रबी सीजन 2026-27 के बुवाई लक्ष्यों से काफी कम हैं। राज्य में इस सीजन के दौरान 21.5 लाख हेक्टेयर में चना और 37.5 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य में रबी की बुवाई की शुरुआत धीमी रही है।
पूर्व कृषि आयुक्त जे.एस. संधू के मुताबिक, बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर दलहन और तिलहन की फसलों पर पड़ सकता है। रबी सीजन में इन फसलों के कुल बुवाई क्षेत्र का करीब 60 से 70 फीसदी हिस्सा बारिश पर निर्भर रहता है। ऐसे में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर किसानों को बुवाई का रकबा घटाना पड़ सकता है। जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा है, वहां भी पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
दलहन और तिलहन की फसलों पर ज्यादा खतरा
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में दलहन की फसलों को लेकर चिंता बढ़ रही है। संधू के मुताबिक, राजस्थान के एक जिले में सरकार ने दलहन की बुवाई के रकबे में 10 फीसदी कमी आने का अनुमान लगाया है।
अगर फसल की बढ़वार के दौरान पर्याप्त पानी नहीं मिला, तो उत्पादन घट सकता है। इसके अलावा अल नीनो के असर से अगर फसल पकने के आखिरी चरण में तापमान ज्यादा बढ़ता है, तो फसल समय से पहले पक सकती है। इससे दाने भरने के लिए मिलने वाला समय कम हो जाता है और पैदावार घटने का खतरा बढ़ जाता है।
जलाशयों में पानी की कमी भी रबी फसलों की खेती को प्रभावित कर सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां नहरों से सिंचाई होती है, वहां पानी की कमी के कारण गेहूं समेत दूसरी फसलों का बुवाई क्षेत्र घट सकता है। संधू के मुताबिक, जिन फसलों को आमतौर पर एक या दो बार सिंचाई की जरूरत होती है, वे भी पानी की कमी से प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में अभी आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति गंभीर है। पानी की कमी का असर चारे के उत्पादन पर भी पड़ सकता है, जिससे पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सर्दियों की बारिश से मिल सकती है राहत
रबी फसलों के लिए सर्दियों में होने वाली बारिश काफी अहम है। उत्तर-पश्चिम भारत में सर्दियों के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश होती है। ये मौसम प्रणालियां भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आती हैं और उत्तर भारत में बारिश लाती हैं। इससे खेतों में नमी बढ़ती है, सिंचाई की जरूरत कम होती है और गेहूं समेत दूसरी फसलों की बढ़वार में मदद मिलती है।
संधू के मुताबिक, अगर इस सीजन में दो से तीन पश्चिमी विक्षोभ के कारण पर्याप्त बारिश होती है, तो मौजूदा हालात में सुधार हो सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों को सर्दियों में पर्याप्त बारिश होने को लेकर आशंका है। उनका मानना है कि अल नीनो का असर दिसंबर तक चरम पर पहुंच सकता है, जिससे पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।
उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान अभी भी 30 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। ऐसे में अगर बारिश की कमी के साथ तापमान भी ज्यादा रहता है, तो रबी फसलों की बढ़वार और पैदावार पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार ने रखा 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
रबी सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने कुल 17.772 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 12.1 करोड़ टन गेहूं, 1.72 करोड़ टन दलहन और 2.23 करोड़ टन मोटे अनाज का लक्ष्य शामिल है।
सरकार ने अलग-अलग फसलों के लिए ये उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं:
गेहूं: 12.1 करोड़ टन
चना: 1.233 करोड़ टन
मसूर: 21 लाख टन
सरसों: 1.43 करोड़ टन
जौ: 24.2 लाख टन
रबी चावल: 1.672 करोड़ टन
रबी मक्का: 1.669 करोड़ टन
ज्वार: 31.9 लाख टन
सरकार के सामने इन लक्ष्यों को हासिल करने की चुनौती होगी। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उत्पादन कितना घटेगा। इसका काफी हद तक दारोमदार आने वाले दिनों में बारिश, खेतों में नमी और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता पर रहेगा।
अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो किसानों को बुवाई का क्षेत्र घटाना पड़ सकता है और फसल की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में रबी सीजन के लिए पानी का संकट एक बड़ी चिंता बन गया है और किसानों की नजर अब सर्दियों की बारिश पर टिकी है।





