इस साल रबी फसलों की बुवाई की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले काफी धीमी चल रही है। गेहूं, सरसों और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई का रकबा घटा है। 30 अक्टूबर तक देश में सिर्फ 37.56 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 69.02 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। यानी इस बार रबी फसलों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले 46 फीसदी कम है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, खेतों में नमी की कमी और दिन के समय ज्यादा तापमान इसकी बड़ी वजह रहे हैं। हालांकि, अब तापमान में गिरावट आने से बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
सरसों और दलहन की बुवाई में भी गिरावट
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर तक सरसों की बुवाई 20.50 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 38.07 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इस तरह सरसों का रकबा 47 फीसदी घटा है।
वहीं, दलहन फसलों की बुवाई में 52 फीसदी की गिरावट आई है। इस साल अब तक 9.45 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 19.56 लाख हेक्टेयर था। दलहन में चना की बुवाई 59 फीसदी घटकर 5.90 लाख हेक्टेयर रह गई है। पिछले साल इसी समय तक 14.35 लाख हेक्टेयर में चना बोया जा चुका था। मसूर की बुवाई भी 2.14 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.10 लाख हेक्टेयर रह गई है।
गेहूं की बुवाई अभी शुरुआती दौर में
रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई भी अभी काफी पीछे है। 30 अक्टूबर तक देश में सिर्फ 19 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 3.34 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। हालांकि, गेहूं की मुख्य बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू होती है और करीब दो महीने तक चलती है। अलग-अलग राज्यों में मौसम के हिसाब से इसका समय बदलता रहता है।
कृषि अधिकारियों के मुताबिक, पहले खेतों में पर्याप्त नमी नहीं थी और दिन का तापमान भी ज्यादा था, जिसकी वजह से किसान बुवाई नहीं कर पा रहे थे। अब मौसम ठंडा होने लगा है, ऐसे में आने वाले दिनों में बुवाई बढ़ने की उम्मीद है। 30 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह में भी बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 52 फीसदी कम रहा।
कृषि मंत्री ने बुवाई में तेजी लाने के दिए निर्देश
इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को रबी फसलों की बुवाई और खरीफ फसलों की कटाई की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में सूखा, चक्रवात और अनियमित बारिश से पैदा हुई चुनौतियों की जानकारी दी।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को किसानों के हित में ठोस रणनीति बनाने और राहत पहुंचाने में किसी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खरीफ फसलों की कटाई पूरी होते ही रबी फसलों की बुवाई में तेजी लाई जाए। साथ ही खेतों में बची हुई नमी का सही इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया।
जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा कम है, वहां किसानों को कम पानी और कम लागत वाली फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है। इनमें चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाज शामिल हैं। इसके अलावा किसानों तक ऐसी उन्नत और जलवायु अनुकूल किस्मों के बीज पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है, जो तापमान में उतार-चढ़ाव और गर्मी को सहन कर सकें।
गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 121 मिलियन टन
पिछले साल देश में गेहूं की बुवाई का रकबा रिकॉर्ड 336 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था। इससे 120.66 मिलियन टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। इस बार सरकार ने रबी सीजन में कुल 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 121 मिलियन टन गेहूं, 17.20 मिलियन टन दलहन और 22.30 मिलियन टन मोटे अनाज का लक्ष्य शामिल है।
अन्य फसलों में चना उत्पादन का लक्ष्य 12.33 मिलियन टन, मसूर का 2.1 मिलियन टन और सरसों का 14.3 मिलियन टन रखा गया है। वहीं, जौ के लिए 2.42 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।





