गेहूं की खेती में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पानी की बढ़ती जरूरत और बदलता मौसम है। ऐसे में ऐसी किस्म किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है, जो कम पानी की परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार दे और खेती से बेहतर आमदनी का मौका दे। इसी कड़ी में ‘पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं पोषण शक्ति 8851’ एक ऐसी किस्म है, जिसे किसानों के लिए खास खूबियों के साथ पेश किया गया है।
समय पर बुवाई और कम पानी में खेती के लिए उपयुक्त
‘पोषण शक्ति 8851’ को समय पर बोई जाने वाली गेहूं की किस्म बताया गया है। यह सीमित सिंचाई वाली परिस्थितियों में केंद्रीय क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। यानी जहां किसानों के पास सिंचाई के लिए पानी सीमित है, वहां भी यह किस्म अच्छी और स्थिर उपज देने में मदद कर सकती है।
39.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज
इस किस्म की एक खासियत इसकी उपज क्षमता भी है। दिए गए विवरण के मुताबिक पोषण शक्ति 8851 से करीब 39.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अनाज उत्पादन प्राप्त हो सकता है। इससे किसानों को कम पानी वाली परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन लेने में मदद मिल सकती है।
पोषण के मामले में भी खास
यह सिर्फ उत्पादन के लिहाज से ही खास नहीं है, बल्कि बायोफोर्टिफाइड गेहूं होने के कारण इसमें पोषण से जुड़े तत्वों की मात्रा भी अच्छी बताई गई है। इसमें करीब 44.3 पीपीएम जिंक और 40.2 पीपीएम आयरन मौजूद है। ऐसे में यह गेहूं उत्पादन के साथ-साथ पोषण सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
किस्म की कम पानी में स्थिर उत्पादन देने की क्षमता और पोषण संबंधी खूबियां इसे किसानों के लिए उपयोगी बनाती हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई का पानी सीमित है, ऐसी किस्में खेती की लागत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद कर सकती हैं।
‘पोषण शक्ति 8851’ की जानकारी ICAR-IARI Regional Station, Indore की ओर से जारी की गई है।





