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पॉपकॉर्न की खेती में बड़ा बदलाव, भारत में तैयार हुए दो नए हाइब्रिड बीज

कंपनी के मुताबिक, भारत में प्रीमियम पॉपकॉर्न के लिए इस्तेमाल होने वाले मक्का के बीज और अनाज का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से आता रहा है।

Pooja Rai

Pooja Rai·25 Aug 2026

पॉपकॉर्न की खेती

पॉपकॉर्न की खेती

भारत में पॉपकॉर्न की खेती को बढ़ावा देने और विदेशी बीजों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। Gourmet Popcornica ने देश में पहली बार दो हाई-एक्सपेंशन नॉन-GMO पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज ‘Krisna459’ और ‘Godari234’ लॉन्च किए हैं। इन बीजों को खास तौर पर भारतीय किसानों और यहां की जलवायु को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

इन दोनों हाइब्रिड बीजों को सोमवार को आंध्र प्रदेश के मुसुनुरु स्थित कंपनी के प्लांट में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने लॉन्च किया। इस दौरान आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे।

विदेशी बीजों पर निर्भरता होगी कम

कंपनी के मुताबिक, भारत में प्रीमियम पॉपकॉर्न के लिए इस्तेमाल होने वाले मक्का के बीज और अनाज का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से आता रहा है।

अब Krisna459 और Godari234 के जरिए देश में ही तैयार हाइब्रिड बीज उपलब्ध होंगे। कंपनी का दावा है कि इन दोनों किस्मों को भारत में ही विकसित किया गया है और पांच सीजन तक अलग-अलग जगहों पर इनका परीक्षण किया गया है।

इन बीजों में बेहतर उत्पादन, कम अवधि में फसल तैयार होने और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता जैसी खूबियां बताई गई हैं। साथ ही, इनसे मिलने वाले पॉपकॉर्न के दाने का आकार और फूलने की क्षमता प्रमुख विदेशी किस्मों के बराबर बताई गई है।

17,500 से ज्यादा किसानों को फायदा

कंपनी के अनुसार, देश के 8 राज्यों के 17,500 से ज्यादा किसान Gourmet Popcornica के साथ जुड़े हुए हैं। ये किसान करीब 40,000 एकड़ में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर रहे हैं।

कंपनी के मुताबिक, इन हाइब्रिड बीजों से औसतन 4.5 टन गीली भुट्टा फसल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है। किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत सुनिश्चित खरीद (Assured Off-take) और तय कीमत का फायदा भी मिलेगा।

इससे छोटे और सीमांत किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार की अनिश्चितता से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

पॉपकॉर्न का बाजार तेजी से बढ़ा

भारत में पॉपकॉर्न मक्का की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, देश का पॉपकॉर्न मक्का बाजार 2014-15 में करीब 50 हजार टन था, जो बढ़कर 2025-26 में लगभग 1.3 लाख टन हो गया है।

फिलहाल घरेलू उत्पादन देश की करीब 70% मांग पूरी कर रहा है। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से 2025-26 में देश को करीब ₹810 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाने का अनुमान है।

कंपनी का लक्ष्य है कि नए हाइब्रिड बीजों की बड़े स्तर पर खेती होने के बाद भारत 2030 तक पॉपकॉर्न के आयात को पूरी तरह खत्म कर सके।

किसानों के लिए क्यों खास है यह बीज?

कंपनी का कहना है कि पहले किसान मुख्य रूप से सामान्य मक्का की खेती करते थे। अब पॉपकॉर्न जैसे वैल्यू-एडेड मक्का की खेती और कॉन्ट्रैक्ट खरीद से उन्हें बेहतर बाजार और कीमत मिल सकती है।

‘Krisna459’ और ‘Godari234’ के लॉन्च से भारतीय बीज, भारतीय तकनीक और भारतीय किसानों के जरिए पॉपकॉर्न उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे एक तरफ विदेशी बीजों पर निर्भरता घटेगी, वहीं किसानों को ज्यादा मूल्य वाली फसल से कमाई बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

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