काफी समय से खेती कर रहे हैं, लेकिन मुनाफा नहीं हो रहा? या खेती की शुरुआत करने जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि ऐसा क्या शुरू किया जाए, जिससे आमदनी बढ़ सके? तो आप एक-दो फसलों की बीज की खेती से भी शुरुआत कर सकते हैं। अगर आपके इलाके में किसी फसल की खेती ज्यादा होती है, लेकिन उसका अच्छा बीज आसानी से नहीं मिलता, तो किसानों की इसी जरूरत को आप अपना अवसर बना सकते हैं और बीज उत्पादन का काम शुरू कर सकते हैं।
ऐसा ही कुछ किया उत्तर प्रदेश के जालौन के परवेंद्र सिंह तोमर ने। कुछ साल पहले जब उनकी उम्र करीब 25 साल थी और उस उम्र में लोग सरकारी नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटकते हैं, तब परवेंद्र ने अपनी पुलिस की सरकारी नौकरी छोड़कर खेती को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। उनका मकसद खेती में कुछ नया करना और अच्छी खेती करना था।
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परवेंद्र बताते हैं कि जब वह नौकरी छोड़कर घर आए तो उनके पिता ने पूछा कि यहां क्यों आए हो? उन्होंने पिता से कहा कि मैंने नौकरी छोड़ दी है, अब खेती में कुछ करके दिखाएंगे और अच्छी खेती करेंगे।
परवेंद्र ने खेती की शुरुआत सरसों, गेहूं और मसूर जैसी फसलों से की। इसके बाद एक दिन उनके हाथ मटर की एक अच्छी किस्म लगी और यहीं से उनकी खेती ने नया मोड़ लिया।

शुरुआत में वह मटर की उपज लेकर मंडी जाते थे। फसल बेचने में मेहनत काफी होती थी, लेकिन उस हिसाब से मुनाफा नहीं मिल पाता था। इसी दौरान उनके मन में एक विचार आया कि अगर उपज बेचने में इतनी मेहनत करनी पड़ रही है, तो क्यों न उपज की जगह बीज ही बेचा जाए।
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परवेंद्र सिंह तोमर बताते हैं “मटर की फली बेचने के लिए हम कानपुर मंडी जाते थे। मेहनत बहुत लगती थी। फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि हम बीज ही क्यों न बेचें।”
इसके बाद परवेंद्र ने कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से अच्छी किस्म का बीज लिया। उन्होंने एक-एक पौधे पर काम किया और धीरे-धीरे उन्नत बीज तैयार किया। आसपास के किसानों को जब इसकी जानकारी हुई तो वे भी बीज के लिए उनसे संपर्क करने लगे और धीरे-धीरे किसानों का नेटवर्क बनता गया।
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परवेंद्र बताते हैं कि उन्होंने पहली बार 5 बीघे में मटर की खेती की। इससे करीब 20 क्विंटल उत्पादन हुआ। इसमें से 10 क्विंटल मटर बेच दिया और 10 क्विंटल अगली बुवाई के लिए बीज के तौर पर रख लिया। इसके बाद दूसरी बार उसी 10 क्विंटल बीज से करीब 100 क्विंटल उत्पादन लिया। इसमें से 20 क्विंटल आगे बुवाई के लिए रखा और करीब 80 क्विंटल बीज के तौर पर बेच दिया।

शुरुआत में आसपास के सिर्फ 8 से 10 गांवों के किसान ही परवेंद्र को जानते थे और बीज के लिए उनसे संपर्क करते थे। लेकिन लगातार मेहनत के बाद उनका नेटवर्क बढ़ता गया।
आज उनका तैयार किया हुआ मटर का बीज उत्तर भारत के करीब 50 गांवों में सप्लाई होता है। इस मॉडल से 200 से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। वहीं उनका मटर का बीज देश के करीब 10 राज्यों तक पहुंच चुका है।
परवेंद्र ने सरकार की ‘भारत बीज’ पहल के बारे में भी बात की। उनका कहना है कि यह सरकार की अच्छी पहल है। कोई भी किसान इससे जुड़कर बीज का बिजनेस शुरू कर सकता है और अपनी आमदनी बढ़ा सकता है।
परवेंद्र ने खेती से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बातें साझा की हैं। उन्होंने खेती की शुरुआत से लेकर बीज उत्पादन, मार्केटिंग और खाद की अहमियत तक के बारे में बताया है।
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