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धान की फसल में तना छेदक और पत्ती लपेटक का खतरा, ऐसे करें बचाव

धान की फसल में तना छेदक और पत्ती लपेटक का प्रकोप फसल की बढ़वार और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। किसान नियमित निगरानी कर समय रहते इनके लक्षणों की पहचान करें। फेरोमोन ट्रैप, बर्ड पर्च और लाइट ट्रैप के साथ जरूरत के अनुसार कृषि विभाग की सुझाई दवाओं का इस्तेमाल कर इन कीटों से फसल को बचाया जा सकता है।

Pooja Rai

Pooja Rai·17 Aug 2026

धान की फसल

धान की फसल

धान की फसल में इस समय किसान फसल की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए लगातार खेत की निगरानी कर रहे हैं। लेकिन बारिश और अनुकूल मौसम के बीच धान में कुछ कीटों का प्रकोप फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। तना छेदक और पत्ती लपेटक धान की फसल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कीटों में शामिल हैं। समय रहते इनकी पहचान कर किसान फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं। बिहार कृषि विभाग की ओर से इन कीटों की पहचान और बचाव के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए गए हैं।

तना छेदक

तना छेदक कीट की मादा का रंग हल्का पीला होता है और उसके पंखों के बीच वाले हिस्से में काला धब्बा दिखाई देता है। इसकी इल्ली धान के तने के अंदर घुसकर उसे नुकसान पहुंचाती है। इसके प्रकोप से पौधे का बीच वाला हिस्सा सूखकर सफेद पड़ जाता है, जिसे आसानी से खींचकर बाहर निकाला जा सकता है। इसे धान में डेड हार्ट की समस्या के रूप में देखा जा सकता है। फसल की नियमित निगरानी कर किसान शुरुआत में ही इस कीट की पहचान कर सकते हैं।

बचाव

तना छेदक से बचाव के लिए खेत में 8-10 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा खेत में बर्ड पर्च लगाए जा सकते हैं, जिससे पक्षी खेत में मौजूद कीटों को खा सकें। शाम के समय खेत में प्रकाश प्रपंच (लाइट ट्रैप) लगाने से भी कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

कृषि विभाग के अनुसार, जरूरत पड़ने पर कार्बोफ्यूरान 3 जी की 25 किलोग्राम, फिप्रोनिल 0.3 जी की 20-25 किलोग्राम या कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी की 20-25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका प्रयोग खेत में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में करने की सलाह दी गई है।

पत्ती लपेटक

धान में पत्ती लपेटक भी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी इल्ली पत्ती के दोनों किनारों को रेशमी धागे से जोड़कर उसके अंदर छिप जाती है। इसके बाद यह पत्ती की हरितिमा यानी हरे हिस्से को खाती है, जिससे पौधे की पत्तियां कमजोर होने लगती हैं और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

नियंत्रण

पत्ती लपेटक के प्रकोप को रोकने के लिए सबसे पहले खेत में मौजूद मित्र कीटों का संरक्षण करने की सलाह दी गई है। जरूरत पड़ने पर नीम आधारित कीटनाशक एजाडिरैक्टिन 1500 पीपीएम की 5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

इसके अलावा, कृषि विभाग की सलाह के अनुसार क्लोरपाइरीफॉस 20% ईसी की 3 मिलीलीटर, लेम्बडा-साइहेलोथ्रिन 5% ईसी की 1 मिलीलीटर या क्विनालफॉस 25% ईसी की 2 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

निगरानी

धान की फसल में इन कीटों से बचाव के लिए किसान खेत की नियमित निगरानी करें और पौधों में तने के सूखने, पत्तियों के मुड़ने या कीट के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत ध्यान दें। समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कृषि विभाग ने अधिक जानकारी के लिए किसानों को अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी या कृषि समन्वयक से संपर्क करने की सलाह दी है।

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