अगर आपके खेत में सेब, बादाम या दूसरे फलों का बाग है, तो अब उसी जमीन से अतिरिक्त कमाई भी की जा सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के इंडियन ग्रासलैंड एंड फॉडर रिसर्च इंस्टीट्यूट (IGFRI) ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें फलों के पेड़ों के बीच खाली पड़ी जगह पर हरे चारे की खेती की जाती है। इस तकनीक को हॉर्टीपास्चर (Hortipasture) कहा जाता है।
एक ही खेत से मिलेगा फल और चारा
इस तकनीक में बाग के बीच की खाली जगह का उपयोग हरे चारे की खेती के लिए किया जाता है। इससे किसानों को एक ही खेत से फल के साथ-साथ पशुओं के लिए चारा भी मिलता है। इससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ सकती है।
हर साल मिलेगा भरपूर हरा चारा
ICAR के अनुसार, इस तकनीक से प्रति हेक्टेयर 35 से 40 टन तक हरा चारा पैदा किया जा सकता है। इतना चारा 4 से 6 बड़े पशुओं की सालभर की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
खरपतवार कम होंगे, मिट्टी भी होगी मजबूत
हॉर्टीपास्चर तकनीक अपनाने से खेत में करीब 80% तक खरपतवार कम हो जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है और कार्बन संरक्षण में भी मदद मिलती है।
दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मददगार
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के चूनट वारी क्षेत्र में इस तकनीक को 20 हेक्टेयर क्षेत्र और 75 बागों में अपनाया गया है। ICAR के अनुसार, इससे पशुओं को हरा चारा आसानी से मिलने लगा और दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
किसानों के लिए बढ़िया विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन किसानों के पास बाग और पशुपालन दोनों हैं, उनके लिए यह तकनीक काफी फायदेमंद हो सकती है। इससे एक ही जमीन से दो तरह का उत्पादन मिलेगा, चारे की लागत घटेगी और खेती के साथ पशुपालन से होने वाली आय भी बढ़ेगी।





