केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि पिछले पांच वर्षों में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजनाओं के तहत कुछ सांसदों और उनके परिवार के सदस्यों को भी सब्सिडी मिली है। इनमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राजस्थान के सिरोही से बीजेपी सांसद लुम्बाराम का नाम शामिल है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि भागीरथ चौधरी ने उन्हें मिली सब्सिडी की पूरी राशि वापस कर दी है।
संसद में क्या दी गई जानकारी?
लोकसभा में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि लुम्बाराम को वर्ष 2025 में और भागीरथ चौधरी को वर्ष 2026 में NHB की योजना के तहत वित्तीय सहायता मिली थी। लेकिन बाद में भागीरथ चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की राशि वापस कर दी। अब बैंक को यह राशि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को लौटाने का निर्देश दिया गया है।
किस योजना के तहत मिलती है सब्सिडी?
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के तहत किसानों और उद्यमियों को व्यावसायिक बागवानी, संरक्षित खेती (Protected Cultivation), फसल कटाई के बाद प्रबंधन (Post-Harvest Management) और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी दी जाती है।
क्या सांसद और मंत्री आवेदन कर सकते हैं?
सरकार ने कहा कि NHB की मौजूदा गाइडलाइन में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो केंद्रीय मंत्री, सांसद या उनके परिवार के सदस्यों को योजना का लाभ लेने से रोकता हो। यदि कोई व्यक्ति योजना की सभी पात्रता शर्तें पूरी करता है, तो वह आवेदन कर सकता है।
कैसे मिलती है सब्सिडी?
सरकार के मुताबिक, यह योजना किसानों, कंपनियों, साझेदारी फर्मों, सहकारी समितियों और अन्य पात्र संस्थाओं के लिए खुली है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। पहले बैंक परियोजना का मूल्यांकन कर टर्म लोन मंजूर करता है। इसके बाद NHB की प्रोजेक्ट एग्जामिनेशन कमेटी (PEC) आवेदन की जांच करती है और मंजूरी मिलने पर ग्रांट ऑफ क्लीयरेंस (GoC) जारी किया जाता है। इसके बाद पात्र आवेदक को सब्सिडी का लाभ मिलता है।





