कश्मीर की पहचान सिर्फ अपनी खूबसूरत वादियों से नहीं, बल्कि यहां के सेब की खेती से भी है। यहां करीब 1.72 लाख हेक्टेयर में सेब की खेती होती है और इससे लगभग 7 लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी है। ऐसे में फसल में बीमारी का प्रकोप किसानों की पैदावार और कमाई दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसी को देखते हुए Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology (SKUAST) ने सेब की फसल में एक फंगीसाइड के इस्तेमाल की सिफारिश की है।
कंपनी Best Agrolife Ltd के मुताबिक, SKUAST ने उसके पेटेंट वाले Tricolour फंगीसाइड को सेब की खेती में इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसे पंखुड़ियां गिरने के समय (Petal Fall Stage) और फल के विकास के दूसरे चरण में इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है।
3 साल तक हुआ ट्रायल
कंपनी के मुताबिक, SKUAST ने Tricolour का करीब तीन साल तक खेतों में ट्रायल किया। इस दौरान इस फंगीसाइड ने सेब में होने वाली Alternaria Leaf Spot, Blight, Powdery Mildew और Scab जैसी फंगल बीमारियों के खिलाफ लगातार अच्छे नतीजे दिखाए।
फल के विकास के दूसरे चरण में इसका इस्तेमाल पहले चरण के करीब 20 दिन बाद करने की सलाह दी गई है। इस समय फल लगभग अखरोट के आकार का हो जाता है।
कंपनी के अनुसार, फल बनने और बढ़ने के समय अगर बारिश और नमी ज्यादा हो तो फंगल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे फल गिरने, फलों की सतह पर दाग पड़ने, पत्तियां गिरने, पैदावार कम होने और फल की गुणवत्ता खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
तीन एक्टिव इंग्रीडिएंट का मिश्रण
Tricolour में तीन एक्टिव इंग्रीडिएंट हैं- Trifloxystrobin 10%, Difenoconazole 12.5% और Sulphur 3%। कंपनी के मुताबिक, इन तीनों का मिश्रण फसल को फंगल बीमारियों से बचाने के साथ बीमारी होने के बाद उसे नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
कंपनी के अनुसार, Tricolour को धान, टमाटर, अंगूर, मिर्च, गेहूं और आम जैसी फसलों में भी इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है।
Best Agrolife एक भारतीय एग्रोकेमिकल कंपनी है, जो कीटनाशक, फंगीसाइड और खरपतवारनाशक समेत फसल सुरक्षा से जुड़े उत्पाद बनाती और बेचती है।
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